“पंचतंत्र की कहानी: चालाक लोमड़ी और मूर्ख बकरी | बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानी”

 कहानी की शुरुआत

एक घने जंगल में एक गहरी कुआँ था। पास ही एक लोमड़ी रोज पानी पीने के लिए आती थी।

एक दिन जंगल में तेज बारिश हुई और कुएँ का रास्ता फिसलन भरा हो गया।

पानी पीते-पीते लोमड़ी का पैर फिसल गया और वह कुएँ में गिर पड़ी।

लोमड़ी बहुत कोशिश करने लगी, परंतु कुएँ की दीवारें इतनी चिकनी थीं कि वह बाहर नहीं आ पा रही थी।


बकरी का आना

थोड़ी देर बाद एक भोली-भाली बकरी वहाँ से गुज़री।

कुएँ को देखकर उसे लगा कि शायद अंदर पानी मीठा होगा।

वह नीचे झांककर बोली—

“बहन लोमड़ी! अंदर क्या कर रही हो?”

लोमड़ी बहुत चालाक थी। उसने फौरन एक योजना बनाई।

लोमड़ी की चालाकी

लोमड़ी बोली—

“अरे बहन! इस कुएँ का पानी बहुत मीठा है। मैं मज़े कर रही हूँ।

अगर तुम भी पीना चाहती हो तो नीचे कूद जाओ।”


बकरी पानी पीने के लिए अंदर कूद गई।

अब दोनों कुएँ में थीं।

बकरी डर गई—

“अब हम बाहर कैसे निकलेंगे?”


लोमड़ी ने कहा—

“डर मत। तुम अपने पैर दीवार पर रखकर खड़ी हो जाओ।

मैं तुम्हारी पीठ पर चढ़कर ऊपर निकल जाऊँगी। फिर तुम्हें भी बाहर निकाल दूँगी।”


बकरी भोली थी। उसने वैसा ही किया।


लोमड़ी का बच निकलना


लोमड़ी बकरी की पीठ पर चढ़कर कुएँ से बाहर आ गई।

बाहर आने के बाद उसने पीछे मुड़कर कहा—


“मूर्ख बकरी! पहले सोचा करो कि नीचे उतरने के बाद ऊपर कैसे आओगी।

सीख यही है कि बिना सोचे-समझे किसी की बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए।”


लोमड़ी जंगल में चली गई, और बकरी अपने निर्णय पर पछताने लगी।


कहानी से मिलने वाली सीख (Moral of the Story)


बिना सोचे-समझे किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

निर्णय हमेशा सोच-विचार कर लेना चाहिए।

मुसीबत में समझदारी सबसे बड़ा हथियार। 



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