Kids Moral Story: नीली मछली और कछुए की सीख | Bengali & Hindi Moral Story for Children

एक समय की बात है, एक गहरे तालाब में बहुत सी रंग-बिरंगी मछलियाँ रहती थीं।
उनमें सबसे छोटी थी नीला—एक चमचमाती नीली मछली।
नीला बहुत खुशमिजाज थी, पर उसकी एक बुरी आदत थी—
वह हमेशा अपने रंग का घमंड करती थी।

हर दिन नीला बाकी मछलियों से कहती,
“मेरे जैसा सुंदर रंग किसी का नहीं! मैं ही तालाब की सबसे खास मछली हूँ!”
बाकी मछलियाँ चुप रहतीं, क्योंकि वे समझती थीं कि नीला छोटी है, इसलिए ऐसा बोलती है।

एक दिन भयंकर बारिश और तूफ़ान आया।
तालाब का पानी गंदा हो गया और तेज़ लहरें उठने लगीं।
सब मछलियाँ डरकर तालाब के गहरे हिस्से में चली गईं।

नीला भी तैरते-तैरते गहरे पानी में पहुँच गई।
वहां उसे एक बड़ा काला पत्थर दिखाई दिया।

पत्थर ने पूछा,
“कौन हो तुम, छोटी मछली?”

नीला घमंड से बोली,
“मैं नीला हूँ! यहाँ की सबसे ख़ूबसूरत मछली!”

पत्थर शांत आवाज़ में बोला,
“खूबसूरती अच्छी बात है, मगर मुसीबत में रंग किसी काम नहीं आते।”

नीला हँसते हुए बोली,
“तुम तो सिर्फ़ एक काला पत्थर हो!”

पत्थर चुप रहा।
उसी समय एक बड़ी तेज़ लहर आई और नीला को जोर से दूर फेंक दिया।
नीला डरकर चिल्लाने लगी—
“बचाओ! कोई मुझे बचाओ!”

तभी वह काला पत्थर हिला।
नीला हैरान रह गई—
वह पत्थर नहीं, बल्कि शिला कछुआ था!
उसका शरीर इतना कठोर था कि दूर से पत्थर जैसा दिखता था।

कछुए ने नीला को अपनी पीठ पर बैठाया और सुरक्षित जगह पर पहुँचा दिया।

तूफ़ान शांत होने पर नीला बोली—
“आज समझ में आया… सुंदर रंग नहीं, अच्छा दिल सबसे बड़ा गुण है।”
कछुआ मुस्कुराकर बोला,
“हाँ छोटी मछली, किसी को उसके बाहरी रूप से नहीं परखा जाता।
सच्ची कीमत उसकी मदद करने की भावना और चरित्र की होती है।”
उस दिन के बाद नीला ने कभी घमंड नहीं किया और सबकी मदद करने लगी।


🌟 कहानी की सीख (Moral of the Story):

बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि अच्छा दिल, चरित्र और मदद करने की भावना ही असली गुण हैं।

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