पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानी: दो मित्र और भालू

दो दोस्त—रवि और शंकर—एक दिन जंगल के रास्ते से जा रहे थे। दोनों ने एक-दूसरे से वादा किया था कि किसी भी मुसीबत में एक-दूसरे की मदद करेंगे।
अचानक सामने से एक बड़ा भालू उनकी ओर आने लगा। रवि डर गया। वह पेड़ पर चढ़ सकता था, इसलिए जल्दी से एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया। लेकिन शंकर पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। वह असहाय होकर ज़मीन पर लेट गया और मरे हुए इंसान की तरह साँस रोककर पड़ा रहा, क्योंकि उसने सुना था कि भालू मृत व्यक्ति को नहीं छूता।

भालू शंकर के पास आया और उसे सूँघा। जब उसे कोई हरकत नहीं दिखी, तो वह उसे सचमुच मरा हुआ समझकर आगे बढ़ गया।
भालू के जाते ही रवि पेड़ से उतर आया और मजाक में बोला—
“भई, भालू तुम्हारे कान में क्या कह गया?”

शंकर ने शांत लेकिन ग़ुस्से में कहा—
“भालू ने कहा कि जो दोस्त मुसीबत में साथ छोड़ दे, वह कभी सच्चा दोस्त नहीं होता।”

रवि शर्मिंदा हो गया।


नीति:

सच्ची दोस्ती की पहचान मुसीबत में होती है।

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