“केकड़ा और लोमड़ी की कहानी – बुद्धि से बड़े जानवर को हराने वाली Panchatantra Moral Story”

एक जंगल के किनारे एक बिल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। पास ही नदी के किनारे एक भोला-भाला केकड़ा रहता था। जब भी केकड़ा खाने की तलाश में बाहर निकलता, लोमड़ी उसे रोज़ डराया करती थी।
एक दिन लोमड़ी ने कहा,
— “सुनो केकड़े, तुम रोज़ नदी में खाने की तलाश में जाते हो। किसी दिन मैं तुम्हें पकड़ कर खा जाऊँगी!”

केकड़ा डर तो गया, लेकिन शांत मन से सोचा, “लोमड़ी चालाक है, पर अगर मैं थोड़ी और बुद्धि लगाऊँ, तो इसे जरूर हरा सकता हूँ।”

अगले दिन केकड़े ने लोमड़ी से कहा,
— “अगर तुम मुझे खाना चाहती हो, तो मेरी एक आख़िरी इच्छा है। नदी के किनारे एक बड़ी मरी हुई मछली पड़ी है, तुम्हें दिखाना चाहता हूँ।”

लालची लोमड़ी तुरंत तैयार हो गई।

नदी के किनारे पहुँचकर केकड़े ने कहा,
— “वह देखो, उधर! ठीक बिल के अंदर झाँकोगे तो दिखाई देगी।”

लोमड़ी जैसे ही बिल के अंदर सिर डालने लगी, केकड़े ने मौका देखकर उसकी पूँछ मजबूती से पकड़ ली।
लोमड़ी दर्द से चीखने लगी और तुरंत भाग गई।
केकड़ा शांत होकर बोला,
— “अगर बुद्धि हो, तो बड़े से बड़ा जानवर भी हार जाता है।”
उस दिन के बाद लोमड़ी ने कभी केकड़े को नहीं डराया।

कहानी की सीख:

👉 बुद्धि और धैर्य शक्ति से भी बड़ी होती है।
👉 छोटा और कमजोर होने पर भी समझदारी से काम लिया जाए, तो बड़ी समस्या भी हल होती है।
👉 लालच हमेशा मुसीबत लाता है।

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