पंचतंत्र की कहानी: चतुर कौआ और दुष्ट साँप

एक पेड़ की डाल पर एक कौआ और उसकी पत्नी रहते थे। हर बार जब वे अंडे देते, नीचे रहने वाला एक दुष्ट साँप आकर अंडे खा जाता था। बार-बार ऐसे अंडे खोकर कौआ-दंपत्ति बहुत दुखी रहते थे।
एक दिन कौए ने सोचा—
“ऐसे तो अब नहीं चलेगा। कुछ न कुछ करना ही होगा।”

वह बुद्धि लगाकर पास के राजमहल की ओर उड़ गया। राजकुमारी तालाब में स्नान कर रही थी। पास में उसका सोने का हार रखा था।
कौए ने अचानक वह सोने का हार उठाया और उड़ चला। महल के रक्षक हार चोरी देखकर कौए के पीछे दौड़ पड़े।

कौआ सीधे जाकर साँप के बिल के सामने वह हार गिरा आया।
रक्षक हार उठाने आए और इसी दौरान साँप को बाहर निकालकर मार डाला।

इस तरह कौआ साँप से छुटकारा पा गया, और फिर किसी ने उसके अंडों को नुकसान नहीं पहुँचाया।


नीतिक शिक्षा

बुद्धिमानी का उपयोग करने से शक्तिशाली शत्रु को भी हराया जा सकता है।

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