बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानियाँ (तीन मछलियों की कहानी)

एक बार की बात है, एक सुंदर नीली झील में तीन मछलियाँ रहती थीं।
झील का पानी चमकता था, कमल के पत्ते हिलते-डुलते थे,
और तीनों मछलियाँ सारा दिन मस्ती में तैरती रहती थीं।
पहली मछली का नाम था बुद्धि — वह बहुत समझदार और सोच-समझकर काम करने वाली थी।
दूसरी का नाम था चालाकी — उसे हर मुश्किल से निकलने का कोई न कोई उपाय आता था।
तीसरी का नाम था ज़िद्दी — वह बहुत हठी थी और किसी भी बदलाव को पसंद नहीं करती थी।

एक दिन, तीनों खेलते-खेलते झील के किनारे पहुँचीं।
वहीं पर बुद्धि ने दो मछुआरों को बात करते सुना।
एक मछुआरा बोला
“कल सुबह हम यहाँ आएँगे, इस झील में बहुत सारी बड़ी मछलियाँ हैं!”

यह सुनते ही बुद्धि के चेहरे का रंग उड़ गया।
वह तुरंत अपने दोस्तों के पास भागी और बोली,
“दोस्तों! सुनो! मछुआरे कल झील में आएँगे! हमें अभी यहाँ से निकल जाना चाहिए!”

चालाकी मुस्कराकर बोली,
“अरे डरती क्यों हो? अगर पकड़े भी गए, तो मैं कोई न कोई चाल चल ही लूँगी।”

पर ज़िद्दी मुँह फुलाकर बोली,
“मैं कहीं नहीं जाऊँगी! मैंने इस झील में जन्म लिया है, यहीं रहूँगी।
अगर किस्मत में पकड़ा जाना लिखा है, तो पकड़ी जाऊँगी!”

बुद्धि ने सिर हिलाते हुए कहा,
“ठीक है, मैं तो जा रही हूँ। तुम लोग संभलकर रहना।”
यह कहकर वह चुपचाप झील से निकलकर एक दूसरी सुरक्षित झील की ओर तैर गई।

अगले दिन सुबह, सूरज निकलते ही मछुआरे आ गए।
उन्होंने झील में बड़ा-सा जाल डाला।
चालाकी ने तुरंत समझदारी दिखाई —
वह “मरी हुई” होने का नाटक करने लगी!
मछुआरे बोले,
“अरे, यह तो मर गई! इसे फेंक दो।”
उन्होंने उसे जाल से बाहर फेंक दिया,
और चालाकी ने झट से पानी में छलाँग लगाकर भाग निकली!

लेकिन ज़िद्दी कुछ नहीं बोली, कुछ नहीं की।
वह सोचती रही, “जो होना होगा, होगा।”
और बेचारी ज़िद्दी सच में पकड़ी गई —
जाल से बाहर निकलने से पहले ही उसका अंत हो गया।


🌟 कहानी की सीख:

समझदारी और समय पर लिया गया निर्णय ही हमें बचा सकता है।
परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं —
जो परिवर्तन को अपनाना सीखता है, वही जीवन में सफल होता है।
ज़िद नहीं, बुद्धि ही असली ताकत है! 🐟💧

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