बेवकूफ़ शेर और चालाक खरगोश

एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक लोभी और डरावना शेर रहता था।
वह रोज़ जंगल के जानवरों पर हमला करता और उन्हें खा जाता।
जंगल के सभी जानवर उससे बहुत डरते थे।

एक दिन सभी जानवर इकट्ठे हुए और एक सभा की।
हिरन बोला, “अगर ऐसा ही चलता रहा तो हममें से कोई भी नहीं बचेगा!”
खरगोश बोला, “चलो एक उपाय करते हैं — हर दिन एक जानवर खुद ही शेर के पास जाएगा।”
सभी जानवरों ने यह बात मान ली।

शेर भी खुश हुआ और बोला,
“अच्छा विचार है! अब मुझे शिकार के लिए दौड़ना नहीं पड़ेगा।”

अगले दिन एक बूढ़े खरगोश की बारी आई।
वह बहुत धीरे-धीरे चला और जब सूरज ढलने लगा, तब जाकर शेर की गुफा में पहुँचा।
शेर ज़ोर से दहाड़ा —
“इतनी देर क्यों लगाई, मूर्ख खरगोश!”

खरगोश डरते हुए बोला,
“महाराज, हम तो बहुत सारे खरगोश मिलकर चल रहे थे,
लेकिन रास्ते में एक दूसरे शेर ने हमें रोक लिया!
मैं किसी तरह वहाँ से भागकर आपको बताने आया हूँ।”

यह सुनकर शेर गुस्से से काँपने लगा —
“क्या कहा! मेरे जंगल में दूसरा शेर!”
“मुझे अभी उसके पास ले चलो!”

चालाक खरगोश शेर को एक गहरे कुएँ के पास ले गया।
उसने कहा, “महाराज, वो यहीं रहता है!”

शेर ने कुएँ में झाँककर देखा —
उसे वहाँ अपना ही प्रतिबिंब दिखाई दिया।
वह सोचने लगा, “अरे! यही तो वो दुस्साहसी शेर है!”
वह ज़ोर से दहाड़ा —
और पानी में उसका प्रतिबिंब भी दहाड़ उठा!
शेर और भड़क गया, चिल्लाया —
“तू मेरे जंगल में रहेगा? अभी तुझे सबक सिखाता हूँ!”

गुस्से में अंधा होकर शेर कुएँ में कूद गया —
छपाक!
और फिर कभी बाहर नहीं निकला।

जंगल के सभी जानवर खुशी से झूम उठे।
बुद्धिमान खरगोश ने पूरे जंगल को बचा लिया। 🐇🌳




📚 कहानी की सीख:
समस्या पर ध्यान देने के बजाय, समाधान पर ध्यान दो।
बुद्धि और शांत दिमाग, शक्ति से कहीं ज़्यादा ताकतवर होते हैं।

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