चालाक गिलहरी और घमंडी हाथी – बच्चों के लिए प्रेरणादायक पंचतंत्र शैली की कहानी
एक घने जंगल में एक बड़ा सा हाथी रहता था—जिसका नाम था महाबल। अपनी ताकत पर उसे बहुत घमंड था। वह जंगल में इधर–उधर घूमता और छोटे जानवरों की तरफ देखता भी नहीं था। कभी–कभी चलते-चलते वह उन्हें गलती से पैरों तले कुचल भी देता।
एक दिन जंगल में भयानक सूखा पड़ गया। जंगल के सभी जानवर बहुत चिंतित हो उठे—क्योंकि पीने के लिए कहीं पानी नहीं था। सबने मिलकर फैसला किया कि जंगल से थोड़ी दूर स्थित कुएँ से पानी लाना होगा। पर वहाँ पहुँचने के लिए एक संकरी पगडंडी से होकर जाना पड़ता था।
जब सभी जानवर एक साथ रास्ते से जा रहे थे, तभी महाबल हाथी उनके सामने खड़ा होकर गुस्से में बोला—
“रुको! पहले मैं जाऊँगा! मैं सबसे ताकतवर हूँ, इसलिए मेरा अधिकार सबसे पहले है!”
छोटे जानवर डरकर पीछे हट गए।
लेकिन एक छोटी सी गिलहरी टुकु हिम्मत करके बोली—
“महाबल भैया, हम सब बराबर परेशान हैं। अगर हम सब साथ जाएँ तो बेहतर होगा।”
लेकिन घमंडी हाथी ने उसकी बात नहीं मानी। वह गरजकर बोला, “मेरी बात सुनो!” और आगे बढ़ने लगा।
अचानक! जैसे ही उसने संकरी राह पर पैर रखा, जमीन टूट गई। वहाँ रेत से भरा एक गड्ढा था, जिसमें हाथी धँस गया। वह जितना भी कोशिश करता, बाहर नहीं निकल पा रहा था।
टुकु गिलहरी और बाकी जानवरों ने मिलकर डाली, लताएँ और कीचड़ इकट्ठा करके एक ढलान बनाया। सबने मिलकर धक्का देकर और रस्सियों को खींचकर हाथी को ऊपर निकाल लिया।
महाबल शर्म से सिर झुका लिया। वह बोला—
“मैंने हमेशा तुम्हें छोटा समझा। लेकिन मुसीबत में तुम लोगों ने ही मेरी मदद की। आज से मैं घमंड छोड़ दूँगा।”
सभी जानवर खुश हो गए। और उस दिन के बाद महाबल सचमुच सबको सम्मान देने लगा।
🌟 नैतिक शिक्षा (Moral Lessons)
घमंड इंसान (या जानवर) को अंधा बना देता है।
छोटा होने पर भी हर कोई महत्वपूर्ण होता है।
मिल-जुलकर काम करने से बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान हो जाती है।
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