वफ़ादार नेवला
एक छोटे-से गाँव में एक किसान दंपत्ति रहते थे। उनके घर में एक पालतू नेवला था — शरारती लेकिन बहुत ही वफ़ादार। नेवला परिवार का हिस्सा बन गया था। वह किसान के छोटे बच्चे के साथ खेलता और उसकी रक्षा करता।
एक दिन अचानक किसान और उसकी पत्नी को ज़रूरी काम से बाहर जाना पड़ा।
जाने से पहले उन्होंने नेवले से कहा,
“हम जल्दी लौटेंगे, तुम हमारे बच्चे का ख़याल रखना।”
नेवले ने मानो सिर हिलाकर कहा, “चिंता मत करो, मैं हूँ ना!”
वे बाहर चले गए, और तभी एक ख़तरनाक साँप धीरे-धीरे घर में घुस आया।
वह बच्चे की ओर बढ़ने लगा।
नेवले ने यह देखा तो बिना डरे उस पर झपट पड़ा।
भयंकर लड़ाई हुई — और आख़िरकार साहसी नेवले ने साँप को मार डाला।
लेकिन उसके मुँह और दाँतों पर ख़ून लग गया।
थोड़ी देर बाद किसान की पत्नी घर लौटी।
दरवाज़े पर नेवले को देखकर उसने देखा — उसके मुँह पर ख़ून लगा है!
वह डर और ग़ुस्से में चिल्ला उठी,
“ओह भगवान! इस नेवले ने मेरे बच्चे को मार डाला!”
उसने बिना सोचे-समझे, ग़ुस्से में नेवले को मार दिया।
जब वह घर के अंदर पहुँची, तो देखा — उसका बच्चा सुरक्षित है और पास में मरा हुआ साँप पड़ा है।
यह दृश्य देखकर उसके हाथ काँप उठे।
उसे समझ में आ गया कि उसने क्या बड़ी गलती कर दी है।
वह फूट-फूटकर रोने लगी — क्योंकि उसने अपने सबसे वफ़ादार साथी को खो दिया था।
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🌼 कहानी की सीख:
कुछ भी करने से पहले हमेशा सोचो।
ग़ुस्से या जल्दबाज़ी में लिया गया फ़ैसला ज़िंदगी भर का पछतावा बन सकता है।
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