“चालाक लोमड़ी और घमंडी भेड़िया – बुद्धि, अहंकार और सीख से भरी हिंदी Moral Story
एक बार जंगल में एक डरावना भेड़िया शिकार की तलाश में घूम रहा था।
काफी देर तक घूमने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिला।
भूख के मारे उसके सिर में चक्कर आ रहा था।
उसी समय उसने देखा—
एक चालाक लोमड़ी आराम से टहल रही है।
भेड़िया गरजा—
“लोमड़ी! आज तू ही मेरा खाना बनेगी! भागने की कोशिश मत करना!”
लोमड़ी डर गई, लेकिन उसने अपना दिमाग शांत रखा।
वह समझ गई कि आज बचने के लिए उसे बुद्धि लगानी होगी।
लोमड़ी ने धीरे से कहा—
“मैं तो बहुत दुबली-पतली हूँ। मुझे खाकर तुम्हारी भूख नहीं मिटेगी।
चलो, मैं तुम्हें एक ऐसी जगह ले चलती हूँ जहाँ रोज़ ढेर सारा खाना मिलता है!”
भेड़िया पहले तो शक में पड़ा,
लेकिन भूख के कारण लोमड़ी की बात मान गया।
लोमड़ी उसे लेकर एक गाँव के पास गई।
वहाँ एक भैंसों का बड़ा अस्तबल था—काफ़ी पशु और ढेर सारा खाना।
लोमड़ी बोली—
“देखो, यहाँ तुम्हें रोज़ आसानी से खाना मिलेगा।
लेकिन सावधान — इस अस्तबल का ‘मोदालाल भैंसा’ बहुत ताकतवर है!”
भेड़िया गुस्से में गरजा—
“मुझे डराने की कोशिश कर रही है? मैं तो उसे अभी सबक सिखाता हूँ!”
लोमड़ी ने एक और चाल चली।
वह बोली—
“ठीक है, थोड़ा पास जाकर देखो कि वो सो रहा है या नहीं।”
भेड़िया आगे बढ़ा।
लेकिन भैंसे ने उसे देखते ही जोरदार लात मारी!
भेड़िया दूर जा गिरा।
उसका चेहरा सूज गया, शरीर में भयंकर दर्द होने लगा।
लोमड़ी पास आकर बोली—
“देखा?
अपनी ताकत का गलत अनुमान लगाने का यही नतीजा होता है!”
भेड़िया शर्म से सिर झुकाकर बोला—
“तू सही कह रही थी…
अहंकार ने मेरा ही नुकसान कर दिया।”
यह कहकर भेड़िया लँगड़ाता हुआ जंगल लौट गया।
नीतिकथा:
1. बुद्धि सबसे बड़ी शक्ति है।
2. अहंकार हमेशा विनाश का कारण बनता है।
3. अपनी क्षमता समझे बिना किसी काम में कूदना बहुत खतरनाक है।
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