निर्हंकार पेड़ की कहानी: नम्रता और अहंकार पर प्रेरक हिंदी नैतिक कथा
यह प्रेरणादायक कहानी दो पेड़ों—एक घमंडी खड़गशिरीष और एक विनम्र आम के पेड़—के माध्यम से नम्रता का महत्व समझाती है। जब एक भयंकर तूफान आता है, तो घमंडी पेड़ टूटकर गिर जाता है, जबकि झुकना जानने वाला आम का पेड़ बच जाता है। कहानी सिखाती है कि अहंकार विनाश की जड़ है, और विनम्रता ही असली ताकत।
🌿 निर्हंकार पेड़
एक घने जंगल में दो भाई पेड़ रहते थे—एक था खड़गशिरीष, और दूसरा आम का पेड़।
खड़गशिरीष पेड़ बहुत ऊँचा, सीधा और अपनी ऊँचाई पर हमेशा घमंड करता था।
आम का पेड़ थोड़ा छोटा था, लेकिन फल से भरा और छाया से भरा।
एक दिन खड़गशिरीष पेड़ बोला—
“मुझे देखो! मैं कितना ऊँचा हूँ। लोग, जानवर, पक्षी सब मुझे देखकर प्रभावित होते हैं। तुम्हारी तरह छोटा होने से क्या फायदा?”
आम का पेड़ हल्का-सा मुस्कुराकर बोला—
“ऊँचाई नहीं, काम बड़ा होता है। लोग मेरी छाया पाते हैं, मेरे फल खाते हैं। यही मेरी खुशी है।”
खड़गशिरीष यह सुनकर और भी नाराज़ हो गया।
“अरे! काम करके क्या होगा? असली ताकत ऊँचाई में है!”
दिन बीतते गए।
एक दिन भयानक तूफान आया। तेज़ हवा ने ऊँचे खड़गशिरीष पेड़ को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया।
पेड़ जितना सीधा खड़ा रहने की कोशिश करता, हवा उतनी ही ताकत से उसे गिराने की कोशिश करती।
उधर आम का पेड़ हवा में झुककर धीरे-धीरे डोल रहा था,
क्योंकि वह जानता था—झुक जाना शर्म नहीं, समझदारी है।
अचानक एक तेज़ आवाज़ हुई, और खड़गशिरीष पेड़ टूटकर गिर पड़ा।
लेकिन आम का पेड़ तूफान थमने के बाद फिर सीधा खड़ा हो गया—मजबूत और सुरक्षित।
तूफान रुकने पर आम का पेड़ धीरे से बोला—
“घमंड किसी का भी सबसे बड़ा दुश्मन होता है।”
🌼 सीख:
नम्रता हमें बचाती है, और घमंड हमें विनाश की ओर ले जाता है।
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