लालची बंदर और नेक तोता – अनोखी हिंदी नीति–कथा | Hindi Moral Story

घने जंगल में एक लाल–मुंह वाला बंदर रहता था।
दिखने में समझदार लगते हुए भी वह अंदर से बहुत लालची था।
जंगल में जो भी सुंदर चीज़ दिखती, वह उसे अपना ही बनाना चाहता था।

उसी जंगल में एक नेकी दिल वाला तोता भी रहता था।
तोता सबकी मदद करता, किसी को धोखा नहीं देता, और खतरा आते ही सबको चेतावनी देता।
इसलिए जंगल के सभी जानवर उसे बहुत प्यार करते थे।
तोते का उपहार

एक दिन तोते को जंगल में एक छुपा हुआ फल का पेड़ मिला।
पेड़ पर लगे फल रंग-बिरंगे, मीठे और सुगंध से भरे थे।

तोते ने खुशी से सबको बताया—
“यह फल का पेड़ सबका है, आओ और फल खाओ!”

सभी जानवर रोज़ थोड़ा-थोड़ा फल खाते और खुश रहते।


बंदर का लालच बढ़ता है

लेकिन बंदर मन ही मन सोचने लगा—
“अगर यह पूरा पेड़ मेरा हो जाए?
तो मैं सारे फल अकेला खाऊँगा!”

रात में वह चुपके से आया, पेड़ को मजबूत रस्सी से बाँध दिया,
और पास में लकड़ी के बड़े डंडे रखकर बोला—

“अब यह पेड़ मेरा है!
कोई फल खाएगा तो मार पड़ेगी!”

अगली सुबह सबने यह देखकर दंग रह गए।

तोता आया और बोला—
“बंदर भाई, यह गलत है। पेड़ सबका है।”

बंदर गुस्से में चिल्ला उठा—
“चुप रहो! जंगल में क्या होगा, मैं तय करूँगा!”


बड़ा खतरा आता है

कुछ दिनों बाद इंसानों का एक समूह वहाँ पहुँचा।
उन्होंने फल देखकर समझ लिया कि यह पेड़ बहुत कीमती है।
वे बोले—
“इस पेड़ को काट देते हैं!”

तोते ने यह सुनते ही सब जानवरों को चेतावनी दी—
“भागो! इंसान पेड़ काटने आ रहे हैं!”

सभी जानवर दौड़कर दूर भाग गए।
लेकिन बंदर तो पेड़ से बंधा था — वह भाग ही नहीं सका।

इंसान चिल्लाए—
“इस पेड़ पर बंदर है! इसे पकड़ो!”

बंदर डर से काँप रहा था।
उसने चिल्लाकर कहा—
“तोते! मुझे बचा लो!”


तोते की बुद्धिमानी

तोता समझ गया कि अब उसे कुछ करना होगा।
वह इंसानों के सामने घायल होने का नाटक करने लगा।
फड़फड़ाकर जमीन पर गिर गया और चुप हो गया।

इंसान बोले—
“अरे! यह तोता मर रहा है, इसे पकड़ो!”

सारे इंसान तोते की ओर दौड़े,
और तभी बंदर ने मौका पाकर रस्सी तोड़ी और भाग निकला।

तोता अचानक उड़ गया।
इंसान समझ गए कि उन्हें धोखा दिया गया है।
गुस्से में वे वहाँ से चले गए।


बंदर को शर्म आती है

बंदर दौड़कर तोते के पास आया और शर्म से बोला—

“मैंने पेड़ पर कब्ज़ा करके गलती की।
फिर भी तुमने मुझे क्यों बचाया?”

तोते ने मुस्कुराकर कहा—

“मूर्ख, पेड़ सबका होता है।
लालच हमेशा नुकसान देता है।
और मैं तुम्हारा दोस्त हूँ—तुम्हें संकट में कैसे छोड़ देता?”

बंदर की आँखें भर आईं।
उसने कहा—

“आज से मैं कभी लालच नहीं करूँगा।
मैं भी सबके लिए भलाई करूँगा।”

उस दिन से पेड़ फिर से सबका हो गया।
और जंगल में फिर से शांति और प्यार लौट आया।



Moral (नीतिकथा):
लालच हमेशा विनाश का कारण बनता है।”
“सच्चा दोस्त बुरे वक्त में साथ नहीं छोड़ता।”

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