पंचतंत्र की कहानी: बुद्धिमान चूहा और लोभी बिल्ली | Hindi Moral Story for Kids

एक पुराने घर के कोने में कई चूहे रहते थे।
घर में एक लोभी और चालाक बिल्ली भी रहती थी।
वह रोज़ चूहों को पकड़ने की कोशिश करती, लेकिन चूहे बहुत सावधान रहते।

दिन-ब-दिन खाने-पीने की समस्या बढ़ रही थी,
क्योंकि चूहे बाहर निकलने से डरते थे।


बिल्ली का जाल

एक दिन बिल्ली ने एक चाल चली।
वह पेड़ की एक टहनी पर खुद को “मरा हुआ” दिखाकर उल्टा लटक गई।
चूहों ने देखकर कहा—
“लगता है बिल्ली मर गई! अब हम आराम से बाहर जा सकते हैं!”
“सभी चूहे खुशी से उछल-कूद करने लगे,
लेकिन एक छोटा, समझदार चूहा चुपचाप सब कुछ देख रहा था।”


बुद्धिमान चूहे का संदेह

छोटा चूहा बोला—
“बिल्ली इतनी आसानी से नहीं मरेगी।
मुझे यकीन है कि यह जाल है!”

बाकी चूहों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया
और खाने की तलाश में बाहर निकल पड़े।

अचानक बिल्ली जोर से छलांग लगाकर नीचे आ गई!
सभी चूहे डरकर भाग खड़े हुए।
लेकिन समझदार चूहा पहले से ही दूर खड़ा सब देख रहा था।




बुद्धिमान चूहा कैसे बचा

वह तेजी से भागते हुए चूहों से बोला—
“अगर तुम मेरी बात सुनते, तो जान जाने की नौबत नहीं आती!”

फिर उसने सलाह दी—
“आगे से कोई भी फैसला करने से पहले
हम सब मिलकर चर्चा करेंगे।”

सब चूहों ने उसकी बात मान ली।
इसके बाद बिल्ली का कोई भी जाल काम नहीं किया।


कहानी की सीख

लोभी व्यक्ति पर जल्दी भरोसा नहीं करना चाहिए।
निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी है।
बुद्धि, सतर्कता और एकता हमें हर संकट से बचा सकती है।





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