Hindi Panchatantra Story: गधा कैसे अपनी मूर्खता से फँस गया
एक बार की बात है, एक धोबी था। उसके पास एक मेहनती गधा था।
गधा दिन भर कपड़े ढोता, नदी से धोए हुए कपड़े लाता और शाम को आराम करता था।
धोबी रोज़ काम के बाद उसे हरे मैदान में चरने भेजता,
लेकिन चालाक गधा मैदान में न जाकर चुपके से गाँववालों के खेतों में घुस जाता।
वहाँ वह पेट भरकर सब्ज़ियाँ खा लेता — बैंगन, लौकी, कद्दू — जो कुछ भी मिलता!
एक दिन उसकी मुलाक़ात एक लोमड़ी 🦊 से हुई।
लोमड़ी चतुर थी और गधा थोड़ा आलसी,
फिर भी दोनों अच्छे दोस्त बन गए।
दोनों ने तय किया —
“चलो, साथ में खाएँ! मैं बाड़ तोड़ दूँगा, तू अंदर जा।”
तो गधा बाड़ तोड़ देता और सब्ज़ियाँ खाता,
लोमड़ी खेत के मुर्गे-मुर्गियों का शिकार करती।
उनकी ज़िंदगी मज़े से चल रही थी।
लेकिन एक रात गधे के मन में एक अजीब-सी बात आई।
वह बोला, “दोस्त लोमड़ी, आज मेरा मन गाने का है!” 🎶
लोमड़ी डर गई और बोली, “नहीं-नहीं भाई, अगर किसी ने सुन लिया तो?”
गधा हँसकर बोला, “अरे! मेरी आवाज़ इतनी मधुर है, सब मेरी तारीफ़ करेंगे!”
लोमड़ी बोली, “ठीक है, मैं दूर से सुनती हूँ।”
(असल में वो भाग गई 😅)
गधा मुँह खोलकर गाने लगा —
“ही-हा! हीई-हा!! हीईईई-हा!!!”
उसकी डरावनी आवाज़ से पूरा गाँव गूंज उठा!
किसान डंडे लेकर दौड़ पड़े 🚶♂️🚶♂️
उन्होंने गधे को पकड़कर खूब मारा,
और उसके गले में एक ओखली (भारी पत्थर) बाँध दी।
बेचारा गधा किसी तरह घर की ओर चला।
रास्ते में उसकी फिर मुलाक़ात लोमड़ी से हुई।
लोमड़ी हँसते हुए बोली,
“अरे दोस्त, क्या सुंदर हार पहना है! ज़रूर किसानों ने तेरे गाने की खुश होकर इनाम दिया होगा!” 😂
गधा कुछ नहीं बोला...
बस सिर झुकाए चुपचाप चलता गया।
🌟 कहानी की सीख:
हर काम का एक समय और जगह होती है।
ज़िद करने से हमेशा नुकसान होता है।
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