ज्ञानी मंत्री की सलाह
एक घने जंगल में कौवों और उल्लुओं के दो समुदाय रहते थे। दिन में कौवे जंगल पर राज करते, और रात में उल्लू। दोनों के बीच पुरानी दुश्मनी थी।
एक रात, जब पूरा जंगल चाँदनी में नहा रहा था, उल्लुओं ने अचानक हमला कर दिया। अंधेरे में साफ़ देखने की ताकत तो उन्हीं के पास थी — बेचारे कौवे कुछ समझ ही नहीं पाए। उन्होंने उड़ने की कोशिश की, पर हर तरफ उल्लू थे। उस रात कई कौवे मारे गए।
सुबह जब यह दुखद समाचार कौवों के राजा तक पहुँचा, तो वह बहुत व्यथित हुआ। उसका हृदय क्रोध और शोक से भर गया। उसने तुरंत अपने दरबार के सबसे ज्ञानी और अनुभवी मंत्री को बुलाया और बोला,
“मंत्रीजी, बताइए, हम क्या करें? हमारे इतने साथी मारे गए हैं!”
मंत्री ने कुछ देर विचार किया, फिर शांत स्वर में कहा,
“महाराज, अभी प्रतिशोध का समय नहीं है। शत्रु को हराने के लिए पहले उसे समझना ज़रूरी है। आप जो कहूँ, वही करें।”
राजा ने सहमति दी।
अगले दिन, कौवों ने मंत्री की योजना पर अमल किया। वे उल्लुओं की गुफा के पास गए और एक नाटक रचा। एक कौवा उल्लुओं की प्रशंसा करने लगा, जबकि बाकी कौवे उसे पीटने लगे। उल्लू यह दृश्य दूर से देख रहे थे।
उनके राजा ने कहा,
“देखो! यह कौवा तो हमारे पक्ष में है। अपने ही साथियों से मार खा रहा है, क्योंकि वह हमसे प्रेम करता है।”
उल्लू राजा ने उस कौवे को अपने राज्य में रहने की अनुमति दे दी। वह कौवा धीरे-धीरे सबका विश्वास जीतने लगा। वह दिन में गुफा के पास छिपा रहता और रात में उल्लुओं से बातें करता।
कुछ दिनों बाद, एक सुबह जब सभी उल्लू गहरी नींद में थे — वह कौवा चुपचाप उड़ गया। उसने अपने साथियों को बुलाया, और सबने मिलकर उल्लुओं की गुफा के मुहाने पर आग लगा दी।
उल्लू तो रात में जागते हैं, दिन में नहीं। जब तक उन्हें कुछ समझ आता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गुफा धुएँ से भर गई, और सभी उल्लू जलकर मर गए।
कौवों का राज्य फिर से सुरक्षित हो गया। राजा ने अपने बुद्धिमान मंत्री को धन्यवाद दिया और कहा,
“आपकी बुद्धि ने हमारे राज्य को बचा लिया।”
कहानी की शिक्षा:
👉 अपने मित्रों को पास रखो,
लेकिन अपने दुश्मनों को और भी पास रखो —
क्योंकि कभी-कभी जीत का रास्ता बुद्धि से होकर गुजरता है, ताकत से नहीं।
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