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Showing posts from November, 2025

बंदर और टोपीवाला कहानी – बच्चों के लिए मजेदार हिंदी नैतिक कथा

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एक मजेदार और शिक्षाप्रद हिंदी नैतिक कथा, जहाँ एक टोपीवाला अपनी बुद्धिमानी से बंदरों से अपनी टोपियाँ वापस लेता है। बच्चों के लिए यह कहानी सिखाती है कि समझदारी ही असली ताकत है। 🐒 "बंदर और टोपीवाला" एक दिन एक टोपीवाला आदमी गाँव में टोपी बेचने निकल पड़ा। धूप बहुत तेज़ थी, इसलिए वह रास्ते में एक बड़े पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा। कुछ देर बाद वह गहरी नींद में सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने देखा— उसकी सारी टोपियाँ गायब! वह घबरा गया और चारों ओर ढूँढ़ने लगा। तभी उसने ऊपर पेड़ की ओर देखा— पेड़ पर कई सारे बंदर बैठे थे, और सबकी सिर पर उसकी टोपियाँ! बंदर मज़े से उछल-कूद कर रहे थे। टोपीवाला पहले तो डर गया, लेकिन फिर उसने सोचा— “बंदर इंसानों की नकल करते हैं।” उसने अपनी सिर की टोपी उतारी, और ज़ोर से नीचे ज़मीन पर फेंक दी। जैसा उसने सोचा था, वही हुआ— सारे बंदरों ने भी उसकी नकल करके अपनी-अपनी टोपियाँ नीचे फेंक दीं! टोपीवाला खुशी-खुशी सारी टोपियाँ इकट्ठा कर लिया और घर लौट गया। 🌼 सीख (Moral): गुस्सा नहीं, बल्कि बुद्धि, धैर्य और समझदारी से समस्या का समाधान किया ...

निर्हंकार पेड़ की कहानी: नम्रता और अहंकार पर प्रेरक हिंदी नैतिक कथा

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यह प्रेरणादायक कहानी दो पेड़ों—एक घमंडी खड़गशिरीष और एक विनम्र आम के पेड़—के माध्यम से नम्रता का महत्व समझाती है। जब एक भयंकर तूफान आता है, तो घमंडी पेड़ टूटकर गिर जाता है, जबकि झुकना जानने वाला आम का पेड़ बच जाता है। कहानी सिखाती है कि अहंकार विनाश की जड़ है, और विनम्रता ही असली ताकत। 🌿 निर्हंकार पेड़ एक घने जंगल में दो भाई पेड़ रहते थे—एक था खड़गशिरीष, और दूसरा आम का पेड़। खड़गशिरीष पेड़ बहुत ऊँचा, सीधा और अपनी ऊँचाई पर हमेशा घमंड करता था। आम का पेड़ थोड़ा छोटा था, लेकिन फल से भरा और छाया से भरा। एक दिन खड़गशिरीष पेड़ बोला— “मुझे देखो! मैं कितना ऊँचा हूँ। लोग, जानवर, पक्षी सब मुझे देखकर प्रभावित होते हैं। तुम्हारी तरह छोटा होने से क्या फायदा?” आम का पेड़ हल्का-सा मुस्कुराकर बोला— “ऊँचाई नहीं, काम बड़ा होता है। लोग मेरी छाया पाते हैं, मेरे फल खाते हैं। यही मेरी खुशी है।” खड़गशिरीष यह सुनकर और भी नाराज़ हो गया। “अरे! काम करके क्या होगा? असली ताकत ऊँचाई में है!” दिन बीतते गए। एक दिन भयानक तूफान आया। तेज़ हवा ने ऊँचे खड़गशिरीष पेड़ को जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। पेड़ जितना ...

बंदर और नकली अक़्ल – मज़ेदार पंचतंत्र कहानी और नीतिकथा | Panchatantra Funny Moral Story in Hindi”

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बंदर और नकली अक़्ल” पंचतंत्र शैली की एक मज़ेदार और सीखभरी कहानी है, जिसमें एक शरारती बंदर अपनी झूठी बातों और चालाकी से कछुए को बेवकूफ़ बनाने की कोशिश करता है। लेकिन सच और शांति‐स्वभाव वाले कछुए की वजह से बंदर खुद ही मुश्किल में फँस जाता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि झूठ, छल और बेवजह की शरारतें हमेशा अपने ही लिए नुकसानदायक होती हैं, जबकि ईमानदारी और धैर्य जीवन में सच्चा सहारा देते हैं। हँसी और सीख से भरी यह कहानी बच्चों और बड़ों—दोनों के लिए रोचक है। पंचतंत्र की मज़ेदार कहानी: बंदर और नकली अक़्ल एक जंगल में एक बहुत शरारती बंदर रहता था। सब उससे डरते थे, क्योंकि वह हमेशा दूसरों को बेवकूफ़ बनाने की तरकीबें सोचता रहता था। एक दिन उसने देखा—एक समझदार कछुआ धीरे–धीरे नदी के किनारे चल रहा है। बंदर ने मन में सोचा, “इस धीमे कछुए के साथ थोड़ी मज़ाक की जाए!” वह पेड़ से कूदकर नीचे आया और चिल्लाकर बोला, “कछुआ भाई, क्या तुम जानते हो कि आज से जंगल में दौड़ प्रतियोगिता होने वाली है! और राजा ने कहा है—जो जीतेगा उसे फलों का पहाड़ मिलेगा!” कछुआ धीरे से बोला, “ऐसी कोई घोषणा तो मैंने नहीं सु...

बुद्धिमान तोता और लालची लोमड़ी – बच्चों के लिए पंचतंत्र की मजेदार कहानी (मोरल के साथ)

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“बुद्धिमान तोता और लालची लोमड़ी” एक मनोरंजक और शिक्षाप्रद कहानी है। जंगल में रहने वाला एक चतुर तोता अपनी बुद्धि का उपयोग करके एक लालची लोमड़ी के जाल से खुद को बचा लेता है। लोमड़ी उसे नीचे बुलाकर पकड़ना चाहती थी, लेकिन तोते ने चालाकी से उसे डराकर भगा दिया। कहानी सिखाती है कि लालच और धोखे की प्रवृत्ति अंत में नुकसान ही करती है, जबकि समझदारी हमेशा रक्षा करती है।                  बुद्धिमान तोता और लालची लोमड़ी एक घने जंगल में एक तोता एक पेड़ की डाल पर रहता था। वह तोता बहुत बुद्धिमान था। उसी जंगल में एक लालची लोमड़ी भी रहती थी, जो हमेशा तोते को पकड़ने की कोशिश करती रहती थी। एक दिन लोमड़ी ने तोते से कहा, “मित्र तोते, तुम बहुत सुंदर गाना गाते हो! ज़रा नीचे आकर मुझे अपना गाना सुनाओ।” तोता समझ गया कि लोमड़ी की नीयत अच्छी नहीं है। उसने तुरंत बुद्धि से काम लिया। तोता पेड़ की ऊँची डाल से बोला, “लोमड़ी बहन, मैंने सुना है कि आज वनरक्षक तुम्हें पकड़ने के लिए जाल बिछा रहे हैं। तुम ज़रा सावधान रहना।” यह सुनते ही लोमड़ी डर गई और वहाँ से भाग खड़ी हु...

चालाक गिलहरी और घमंडी हाथी – बच्चों के लिए प्रेरणादायक पंचतंत्र शैली की कहानी

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एक घने जंगल में एक बड़ा सा हाथी रहता था—जिसका नाम था महाबल। अपनी ताकत पर उसे बहुत घमंड था। वह जंगल में इधर–उधर घूमता और छोटे जानवरों की तरफ देखता भी नहीं था। कभी–कभी चलते-चलते वह उन्हें गलती से पैरों तले कुचल भी देता। एक दिन जंगल में भयानक सूखा पड़ गया। जंगल के सभी जानवर बहुत चिंतित हो उठे—क्योंकि पीने के लिए कहीं पानी नहीं था। सबने मिलकर फैसला किया कि जंगल से थोड़ी दूर स्थित कुएँ से पानी लाना होगा। पर वहाँ पहुँचने के लिए एक संकरी पगडंडी से होकर जाना पड़ता था। जब सभी जानवर एक साथ रास्ते से जा रहे थे, तभी महाबल हाथी उनके सामने खड़ा होकर गुस्से में बोला— “रुको! पहले मैं जाऊँगा! मैं सबसे ताकतवर हूँ, इसलिए मेरा अधिकार सबसे पहले है!” छोटे जानवर डरकर पीछे हट गए। लेकिन एक छोटी सी गिलहरी टुकु हिम्मत करके बोली— “महाबल भैया, हम सब बराबर परेशान हैं। अगर हम सब साथ जाएँ तो बेहतर होगा।” लेकिन घमंडी हाथी ने उसकी बात नहीं मानी। वह गरजकर बोला, “मेरी बात सुनो!” और आगे बढ़ने लगा। अचानक! जैसे ही उसने संकरी राह पर पैर रखा, जमीन टूट गई। वहाँ रेत से भरा एक गड्ढा था, जिसमें हाथी धँस गया। वह जितना ...

Kids Moral Story: नीली मछली और कछुए की सीख | Bengali & Hindi Moral Story for Children

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एक समय की बात है, एक गहरे तालाब में बहुत सी रंग-बिरंगी मछलियाँ रहती थीं। उनमें सबसे छोटी थी नीला—एक चमचमाती नीली मछली। नीला बहुत खुशमिजाज थी, पर उसकी एक बुरी आदत थी— वह हमेशा अपने रंग का घमंड करती थी। हर दिन नीला बाकी मछलियों से कहती, “मेरे जैसा सुंदर रंग किसी का नहीं! मैं ही तालाब की सबसे खास मछली हूँ!” बाकी मछलियाँ चुप रहतीं, क्योंकि वे समझती थीं कि नीला छोटी है, इसलिए ऐसा बोलती है। एक दिन भयंकर बारिश और तूफ़ान आया। तालाब का पानी गंदा हो गया और तेज़ लहरें उठने लगीं। सब मछलियाँ डरकर तालाब के गहरे हिस्से में चली गईं। नीला भी तैरते-तैरते गहरे पानी में पहुँच गई। वहां उसे एक बड़ा काला पत्थर दिखाई दिया। पत्थर ने पूछा, “कौन हो तुम, छोटी मछली?” नीला घमंड से बोली, “मैं नीला हूँ! यहाँ की सबसे ख़ूबसूरत मछली!” पत्थर शांत आवाज़ में बोला, “खूबसूरती अच्छी बात है, मगर मुसीबत में रंग किसी काम नहीं आते।” नीला हँसते हुए बोली, “तुम तो सिर्फ़ एक काला पत्थर हो!” पत्थर चुप रहा। उसी समय एक बड़ी तेज़ लहर आई और नीला को जोर से दूर फेंक दिया। नीला डरकर चिल्लाने लगी— “बचाओ! कोई मुझे बचाओ!” तभी वह काल...

लालची बंदर और नेक तोता – अनोखी हिंदी नीति–कथा | Hindi Moral Story

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घने जंगल में एक लाल–मुंह वाला बंदर रहता था। दिखने में समझदार लगते हुए भी वह अंदर से बहुत लालची था। जंगल में जो भी सुंदर चीज़ दिखती, वह उसे अपना ही बनाना चाहता था। उसी जंगल में एक नेकी दिल वाला तोता भी रहता था। तोता सबकी मदद करता, किसी को धोखा नहीं देता, और खतरा आते ही सबको चेतावनी देता। इसलिए जंगल के सभी जानवर उसे बहुत प्यार करते थे। ⭐ तोते का उपहार एक दिन तोते को जंगल में एक छुपा हुआ फल का पेड़ मिला। पेड़ पर लगे फल रंग-बिरंगे, मीठे और सुगंध से भरे थे। तोते ने खुशी से सबको बताया— “यह फल का पेड़ सबका है, आओ और फल खाओ!” सभी जानवर रोज़ थोड़ा-थोड़ा फल खाते और खुश रहते। ⭐ बंदर का लालच बढ़ता है लेकिन बंदर मन ही मन सोचने लगा— “अगर यह पूरा पेड़ मेरा हो जाए? तो मैं सारे फल अकेला खाऊँगा!” रात में वह चुपके से आया, पेड़ को मजबूत रस्सी से बाँध दिया, और पास में लकड़ी के बड़े डंडे रखकर बोला— “अब यह पेड़ मेरा है! कोई फल खाएगा तो मार पड़ेगी!” अगली सुबह सबने यह देखकर दंग रह गए। तोता आया और बोला— “बंदर भाई, यह गलत है। पेड़ सबका है।” बंदर गुस्से में चिल्ला उठा— “चुप रहो! जंगल में क्या होगा, मै...

पंचतंत्र की कहानी: बुद्धिमान चूहा और लोभी बिल्ली | Hindi Moral Story for Kids

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एक पुराने घर के कोने में कई चूहे रहते थे। घर में एक लोभी और चालाक बिल्ली भी रहती थी। वह रोज़ चूहों को पकड़ने की कोशिश करती, लेकिन चूहे बहुत सावधान रहते। दिन-ब-दिन खाने-पीने की समस्या बढ़ रही थी, क्योंकि चूहे बाहर निकलने से डरते थे। बिल्ली का जाल एक दिन बिल्ली ने एक चाल चली। वह पेड़ की एक टहनी पर खुद को “मरा हुआ” दिखाकर उल्टा लटक गई। चूहों ने देखकर कहा— “लगता है बिल्ली मर गई! अब हम आराम से बाहर जा सकते हैं!” “सभी चूहे खुशी से उछल-कूद करने लगे, लेकिन एक छोटा, समझदार चूहा चुपचाप सब कुछ देख रहा था।” बुद्धिमान चूहे का संदेह छोटा चूहा बोला— “बिल्ली इतनी आसानी से नहीं मरेगी। मुझे यकीन है कि यह जाल है!” बाकी चूहों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और खाने की तलाश में बाहर निकल पड़े। अचानक बिल्ली जोर से छलांग लगाकर नीचे आ गई! सभी चूहे डरकर भाग खड़े हुए। लेकिन समझदार चूहा पहले से ही दूर खड़ा सब देख रहा था। बुद्धिमान चूहा कैसे बचा वह तेजी से भागते हुए चूहों से बोला— “अगर तुम मेरी बात सुनते, तो जान जाने की नौबत नहीं आती!” फिर उसने सलाह दी— “आगे से कोई भी फैसला करने से पहले हम सब मिलकर चर्...

“पंचतंत्र की कहानी: चालाक लोमड़ी और मूर्ख बकरी | बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानी”

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  कहानी की शुरुआत एक घने जंगल में एक गहरी कुआँ था। पास ही एक लोमड़ी रोज पानी पीने के लिए आती थी। एक दिन जंगल में तेज बारिश हुई और कुएँ का रास्ता फिसलन भरा हो गया। पानी पीते-पीते लोमड़ी का पैर फिसल गया और वह कुएँ में गिर पड़ी। लोमड़ी बहुत कोशिश करने लगी, परंतु कुएँ की दीवारें इतनी चिकनी थीं कि वह बाहर नहीं आ पा रही थी। बकरी का आना थोड़ी देर बाद एक भोली-भाली बकरी वहाँ से गुज़री। कुएँ को देखकर उसे लगा कि शायद अंदर पानी मीठा होगा। वह नीचे झांककर बोली— “बहन लोमड़ी! अंदर क्या कर रही हो?” लोमड़ी बहुत चालाक थी। उसने फौरन एक योजना बनाई। लोमड़ी की चालाकी लोमड़ी बोली— “अरे बहन! इस कुएँ का पानी बहुत मीठा है। मैं मज़े कर रही हूँ। अगर तुम भी पीना चाहती हो तो नीचे कूद जाओ।” बकरी पानी पीने के लिए अंदर कूद गई। अब दोनों कुएँ में थीं। बकरी डर गई— “अब हम बाहर कैसे निकलेंगे?” लोमड़ी ने कहा— “डर मत। तुम अपने पैर दीवार पर रखकर खड़ी हो जाओ। मैं तुम्हारी पीठ पर चढ़कर ऊपर निकल जाऊँगी। फिर तुम्हें भी बाहर निकाल दूँगी।” बकरी भोली थी। उसने वैसा ही किया। लोमड़ी का बच निकलना लोमड़ी बकरी की पीठ पर चढ़कर कुएँ से ब...

लोभी व्यापारी और बुद्धिमान यात्री की कहानी हिंदी में | Panchatantra Moral Story

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एक समय की बात है, एक लोभी व्यापारी नदी पार करके दूर के बाजार में जाया करता था। उसी नाव में एक गरीब यात्री भी सवार था। यात्री के पास सिर्फ एक छोटा-सा कपड़े का थैला था—जिसमें उसका थोड़ा-बहुत खाना और कुछ साधारण सामान रखा था। व्यापारी ने सोचा कि थैले में जरूर कोई कीमती चीज़ होगी। उसने मन ही मन योजना बनाई— “नदी के बीच पहुँचकर मौका मिलते ही मैं यह थैला लेकर भाग जाऊँगा!” जब नाव नदी के गहरे हिस्से में पहुँची, व्यापारी मुस्कुराते हुए यात्री के पास गया और बोला, “भाई, तुम्हारा थैला बहुत अच्छा लग रहा है। जरूर इसमें कुछ कीमती चीज़ होगी?” यात्री ने कहा, “नहीं भाई, खास कुछ नहीं। लेकिन हाँ, इस थैले में एक बहुत ज़रूरी चीज़ है—इसलिए इसे मजबूती से बाँधकर रखा है।” यह सुनकर व्यापारी और भी लालची हो गया। जब नाव बिल्कुल बीच धारा में पहुँची, तब व्यापारी अचानक थैला छीनकर नदी में कूद गया। वह तैरकर थोड़ा दूर गया और थैला खोलते ही दंग रह गया! अंदर सिर्फ सूखी रोटी, दो पत्थर और एक चिट्ठी थी। चिट्ठी में लिखा था— “लोभ में पड़कर जो व्यक्ति किसी और की चीज़ लेना चाहता है, वह कभी सफल नहीं होता। इंसा...

पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानी: दो मित्र और भालू

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दो दोस्त—रवि और शंकर—एक दिन जंगल के रास्ते से जा रहे थे। दोनों ने एक-दूसरे से वादा किया था कि किसी भी मुसीबत में एक-दूसरे की मदद करेंगे। अचानक सामने से एक बड़ा भालू उनकी ओर आने लगा। रवि डर गया। वह पेड़ पर चढ़ सकता था, इसलिए जल्दी से एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया। लेकिन शंकर पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। वह असहाय होकर ज़मीन पर लेट गया और मरे हुए इंसान की तरह साँस रोककर पड़ा रहा, क्योंकि उसने सुना था कि भालू मृत व्यक्ति को नहीं छूता। भालू शंकर के पास आया और उसे सूँघा। जब उसे कोई हरकत नहीं दिखी, तो वह उसे सचमुच मरा हुआ समझकर आगे बढ़ गया। भालू के जाते ही रवि पेड़ से उतर आया और मजाक में बोला— “भई, भालू तुम्हारे कान में क्या कह गया?” शंकर ने शांत लेकिन ग़ुस्से में कहा— “भालू ने कहा कि जो दोस्त मुसीबत में साथ छोड़ दे, वह कभी सच्चा दोस्त नहीं होता।” रवि शर्मिंदा हो गया। नीति : सच्ची दोस्ती की पहचान मुसीबत में होती है।

“केकड़ा और लोमड़ी की कहानी – बुद्धि से बड़े जानवर को हराने वाली Panchatantra Moral Story”

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एक जंगल के किनारे एक बिल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। पास ही नदी के किनारे एक भोला-भाला केकड़ा रहता था। जब भी केकड़ा खाने की तलाश में बाहर निकलता, लोमड़ी उसे रोज़ डराया करती थी। एक दिन लोमड़ी ने कहा, — “सुनो केकड़े, तुम रोज़ नदी में खाने की तलाश में जाते हो। किसी दिन मैं तुम्हें पकड़ कर खा जाऊँगी!” केकड़ा डर तो गया, लेकिन शांत मन से सोचा, “लोमड़ी चालाक है, पर अगर मैं थोड़ी और बुद्धि लगाऊँ, तो इसे जरूर हरा सकता हूँ।” अगले दिन केकड़े ने लोमड़ी से कहा, — “अगर तुम मुझे खाना चाहती हो, तो मेरी एक आख़िरी इच्छा है। नदी के किनारे एक बड़ी मरी हुई मछली पड़ी है, तुम्हें दिखाना चाहता हूँ।” लालची लोमड़ी तुरंत तैयार हो गई। नदी के किनारे पहुँचकर केकड़े ने कहा, — “वह देखो, उधर! ठीक बिल के अंदर झाँकोगे तो दिखाई देगी।” लोमड़ी जैसे ही बिल के अंदर सिर डालने लगी, केकड़े ने मौका देखकर उसकी पूँछ मजबूती से पकड़ ली। लोमड़ी दर्द से चीखने लगी और तुरंत भाग गई। केकड़ा शांत होकर बोला, — “अगर बुद्धि हो, तो बड़े से बड़ा जानवर भी हार जाता है।” उस दिन के बाद लोमड़ी ने कभी केकड़े को नहीं डराया। ⭐ ...

“कौआ और लोमड़ी की कहानी (माँस वाला) – Panchatantra की बेस्ट Moral Story”

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एक घने जंगल में एक बड़े पेड़ की डाल पर एक कौआ बैठा था। उसकी चोंच में एक टुकड़ा माँस था। वह उसे आराम से खाने ही वाला था कि तभी एक चालाक लोमड़ी उधर से गुज़री। लोमड़ी ने कौए की चोंच में माँस देखा और उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा — “सीधे माँगने से तो माँस नहीं मिलेगा। इसे धोखा देना पड़ेगा।” लोमड़ी पेड़ के नीचे खड़ी होकर मीठी आवाज़ में बोली— “अरे कौए भाई! तुम कितने सुंदर लग रहे हो! जरूर तुम्हारी आवाज़ भी बहुत मीठी होगी। अगर तुम एक बार गाना सुनाओ, तो मेरा दिन बन जाए!” कौआ लोमड़ी की तारीफ़ सुनकर खुश हो गया। उसके मन में आया — “क्या सच में मेरी आवाज़ इतनी अच्छी है?” खुशी में वह गाना गाने के लिए चोंच खोला — और चोंच खुलते ही माँस का टुकड़ा नीचे गिर पड़ा। लोमड़ी तो पहले से ही तैयार थी। उसने झटपट माँस उठाया और हँसते हुए बोली— “धन्यवाद कौए भाई! तुम्हारी आवाज़ कैसी है, मुझे नहीं पता… लेकिन तुम बहुत बेवकूफ हो!” यह कहकर लोमड़ी माँस लेकर वहाँ से भाग गई। बेचारा कौआ अपनी मूर्खता पर पछताने लगा। ⭐ कहानी की सीख: 👉 मीठी बातों पर जल्दी भरोसा नहीं करना चाहिए। 👉 चापलूसी हमेशा सच न...

“चालाक लोमड़ी और घमंडी भेड़िया – बुद्धि, अहंकार और सीख से भरी हिंदी Moral Story

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एक बार जंगल में एक डरावना भेड़िया शिकार की तलाश में घूम रहा था। काफी देर तक घूमने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिला। भूख के मारे उसके सिर में चक्कर आ रहा था। उसी समय उसने देखा— एक चालाक लोमड़ी आराम से टहल रही है। भेड़िया गरजा— “लोमड़ी! आज तू ही मेरा खाना बनेगी! भागने की कोशिश मत करना!” लोमड़ी डर गई, लेकिन उसने अपना दिमाग शांत रखा। वह समझ गई कि आज बचने के लिए उसे बुद्धि लगानी होगी। लोमड़ी ने धीरे से कहा— “मैं तो बहुत दुबली-पतली हूँ। मुझे खाकर तुम्हारी भूख नहीं मिटेगी। चलो, मैं तुम्हें एक ऐसी जगह ले चलती हूँ जहाँ रोज़ ढेर सारा खाना मिलता है!” भेड़िया पहले तो शक में पड़ा, लेकिन भूख के कारण लोमड़ी की बात मान गया। लोमड़ी उसे लेकर एक गाँव के पास गई। वहाँ एक भैंसों का बड़ा अस्तबल था—काफ़ी पशु और ढेर सारा खाना। लोमड़ी बोली— “देखो, यहाँ तुम्हें रोज़ आसानी से खाना मिलेगा। लेकिन सावधान — इस अस्तबल का ‘मोदालाल भैंसा’ बहुत ताकतवर है!” भेड़िया गुस्से में गरजा— “मुझे डराने की कोशिश कर रही है? मैं तो उसे अभी सबक सिखाता हूँ!” लोमड़ी ने एक और चाल चली। वह बोली— “ठीक है, थोड़ा पास जाकर देखो कि वो सो...

पंचतंत्र की कहानी: चतुर कौआ और दुष्ट साँप

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एक पेड़ की डाल पर एक कौआ और उसकी पत्नी रहते थे। हर बार जब वे अंडे देते, नीचे रहने वाला एक दुष्ट साँप आकर अंडे खा जाता था। बार-बार ऐसे अंडे खोकर कौआ-दंपत्ति बहुत दुखी रहते थे। एक दिन कौए ने सोचा— “ऐसे तो अब नहीं चलेगा। कुछ न कुछ करना ही होगा।” वह बुद्धि लगाकर पास के राजमहल की ओर उड़ गया। राजकुमारी तालाब में स्नान कर रही थी। पास में उसका सोने का हार रखा था। कौए ने अचानक वह सोने का हार उठाया और उड़ चला। महल के रक्षक हार चोरी देखकर कौए के पीछे दौड़ पड़े। कौआ सीधे जाकर साँप के बिल के सामने वह हार गिरा आया। रक्षक हार उठाने आए और इसी दौरान साँप को बाहर निकालकर मार डाला। इस तरह कौआ साँप से छुटकारा पा गया, और फिर किसी ने उसके अंडों को नुकसान नहीं पहुँचाया। नीतिक शिक्षा बुद्धिमानी का उपयोग करने से शक्तिशाली शत्रु को भी हराया जा सकता है।

Hindi Panchatantra Story: गधा कैसे अपनी मूर्खता से फँस गया

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एक बार की बात है, एक धोबी था। उसके पास एक मेहनती गधा था। गधा दिन भर कपड़े ढोता, नदी से धोए हुए कपड़े लाता और शाम को आराम करता था। धोबी रोज़ काम के बाद उसे हरे मैदान में चरने भेजता, लेकिन चालाक गधा मैदान में न जाकर चुपके से गाँववालों के खेतों में घुस जाता। वहाँ वह पेट भरकर सब्ज़ियाँ खा लेता — बैंगन, लौकी, कद्दू — जो कुछ भी मिलता! एक दिन उसकी मुलाक़ात एक लोमड़ी 🦊 से हुई। लोमड़ी चतुर थी और गधा थोड़ा आलसी, फिर भी दोनों अच्छे दोस्त बन गए। दोनों ने तय किया — “चलो, साथ में खाएँ! मैं बाड़ तोड़ दूँगा, तू अंदर जा।” तो गधा बाड़ तोड़ देता और सब्ज़ियाँ खाता, लोमड़ी खेत के मुर्गे-मुर्गियों का शिकार करती। उनकी ज़िंदगी मज़े से चल रही थी। लेकिन एक रात गधे के मन में एक अजीब-सी बात आई। वह बोला, “दोस्त लोमड़ी, आज मेरा मन गाने का है!” 🎶 लोमड़ी डर गई और बोली, “नहीं-नहीं भाई, अगर किसी ने सुन लिया तो?” गधा हँसकर बोला, “अरे! मेरी आवाज़ इतनी मधुर है, सब मेरी तारीफ़ करेंगे!” लोमड़ी बोली, “ठीक है, मैं दूर से सुनती हूँ।” (असल में वो भाग गई 😅) गधा मुँह खोलकर गाने लगा — “ही-हा! हीई-हा!! ही...

🦊 लोमड़ी और ढोल

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एक दिन, एक चालाक लोमड़ी खाने की तलाश में बहुत दूर निकल गई। चारों ओर सन्नाटा था — कोई जानवर नहीं, बस हवा की “हूंss हूंss” आवाज़। अचानक उसे ढोल जैसी आवाज़ सुनाई दी — “धुप! धुप! धुप!” वह डर गई और सोचने लगी, “अरे बाप रे! यह जरूर कोई भयानक राक्षस होगा!” फिर उसने खुद से कहा, “नहीं! मैं बिना देखे क्यों डर रही हूँ? पहले जाकर देखती हूँ।” वह धीरे-धीरे उस दिशा में चली, और जाकर देखा — एक पुराना ढोल (ड्रम) पेड़ के पास पड़ा है। हवा चलने पर पेड़ की डालियाँ ढोल से टकरा रही थीं, और उसी से यह आवाज़ आ रही थी। लोमड़ी ज़ोर से हँस पड़ी — “अरे! मैं तो यूँ ही डरकर भागने वाली थी!” उसका डर मिट गया, और वह खुशी-खुशी फिर से खाने की तलाश में चल पड़ी। 📚 कहानी की सीख: डरकर भागो मत — समस्या का सामना करो, तभी पता चलेगा कि डरने की बात ही नहीं थी। 🦊✨

🐘 हाथी और गौरैया 🐦

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एक घने, हरे जंगल में एक ऊँचा और मजबूत पेड़ था। उस पेड़ की एक डाल पर एक जोड़ी गौरैया रहती थी। उन्होंने बहुत प्यार से अपना छोटा-सा सुंदर घोंसला बनाया था। उस घोंसले में उनके कुछ अंडे थे, जिनसे जल्द ही उनके नन्हे बच्चे निकलने वाले थे। एक दिन उस जंगल में एक घमंडी हाथी आया। वह बहुत ताकतवर था, लेकिन अपने बल पर उसे बहुत घमंड था। बिना किसी कारण के उसने पेड़ को इतनी ज़ोर से हिलाया कि गौरैयों का घोंसला नीचे गिर गया और उनके सारे अंडे टूटकर नष्ट हो गए। गौरैया दंपति बहुत दुखी हुए। उनके आँसू थम ही नहीं रहे थे। लेकिन उन्होंने ठान लिया—वह हाथी को सबक सिखाकर रहेंगे। गौरैयों ने अपने दोस्त कठफोड़वा को बुलाया। कठफोड़वा बहुत बुद्धिमान था। उसने अपने दो और मित्रों—एक मक्खी और एक मेंढक—को बुलाया और सबने मिलकर एक चतुर योजना बनाई। मेंढक बोला, “मक्खी, तुम हाथी के कान के पास भिनभिनाकर उसे परेशान करो। जब वह आँखें बंद करेगा, तो कठफोड़वा तुम उड़कर उसकी आँखों में चोंच मार देना।” कठफोड़वा बोला, “फिर जब वह पानी की तलाश में जाएगा, तो मेंढक, तुम थोड़ी दूर जाकर टर्र-टर्र करना। हाथी समझेगा कि वहाँ पानी है और तुम...

ज्ञानी मंत्री की सलाह

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एक घने जंगल में कौवों और उल्लुओं के दो समुदाय रहते थे। दिन में कौवे जंगल पर राज करते, और रात में उल्लू। दोनों के बीच पुरानी दुश्मनी थी। एक रात, जब पूरा जंगल चाँदनी में नहा रहा था, उल्लुओं ने अचानक हमला कर दिया। अंधेरे में साफ़ देखने की ताकत तो उन्हीं के पास थी — बेचारे कौवे कुछ समझ ही नहीं पाए। उन्होंने उड़ने की कोशिश की, पर हर तरफ उल्लू थे। उस रात कई कौवे मारे गए। सुबह जब यह दुखद समाचार कौवों के राजा तक पहुँचा, तो वह बहुत व्यथित हुआ। उसका हृदय क्रोध और शोक से भर गया। उसने तुरंत अपने दरबार के सबसे ज्ञानी और अनुभवी मंत्री को बुलाया और बोला, “मंत्रीजी, बताइए, हम क्या करें? हमारे इतने साथी मारे गए हैं!” मंत्री ने कुछ देर विचार किया, फिर शांत स्वर में कहा, “महाराज, अभी प्रतिशोध का समय नहीं है। शत्रु को हराने के लिए पहले उसे समझना ज़रूरी है। आप जो कहूँ, वही करें।” राजा ने सहमति दी। अगले दिन, कौवों ने मंत्री की योजना पर अमल किया। वे उल्लुओं की गुफा के पास गए और एक नाटक रचा। एक कौवा उल्लुओं की प्रशंसा करने लगा, जबकि बाकी कौवे उसे पीटने लगे। उल्लू यह दृश्य दूर से देख रहे थे। उनके र...

बेवकूफ़ शेर और चालाक खरगोश

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एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक लोभी और डरावना शेर रहता था। वह रोज़ जंगल के जानवरों पर हमला करता और उन्हें खा जाता। जंगल के सभी जानवर उससे बहुत डरते थे। एक दिन सभी जानवर इकट्ठे हुए और एक सभा की। हिरन बोला, “अगर ऐसा ही चलता रहा तो हममें से कोई भी नहीं बचेगा!” खरगोश बोला, “चलो एक उपाय करते हैं — हर दिन एक जानवर खुद ही शेर के पास जाएगा।” सभी जानवरों ने यह बात मान ली। शेर भी खुश हुआ और बोला, “अच्छा विचार है! अब मुझे शिकार के लिए दौड़ना नहीं पड़ेगा।” अगले दिन एक बूढ़े खरगोश की बारी आई। वह बहुत धीरे-धीरे चला और जब सूरज ढलने लगा, तब जाकर शेर की गुफा में पहुँचा। शेर ज़ोर से दहाड़ा — “इतनी देर क्यों लगाई, मूर्ख खरगोश!” खरगोश डरते हुए बोला, “महाराज, हम तो बहुत सारे खरगोश मिलकर चल रहे थे, लेकिन रास्ते में एक दूसरे शेर ने हमें रोक लिया! मैं किसी तरह वहाँ से भागकर आपको बताने आया हूँ।” यह सुनकर शेर गुस्से से काँपने लगा — “क्या कहा! मेरे जंगल में दूसरा शेर!” “मुझे अभी उसके पास ले चलो!” चालाक खरगोश शेर को एक गहरे कुएँ के पास ले गया। उसने कहा, “महाराज, वो यहीं रहता है!” शेर...

बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानियाँ (तीन मछलियों की कहानी)

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एक बार की बात है, एक सुंदर नीली झील में तीन मछलियाँ रहती थीं। झील का पानी चमकता था, कमल के पत्ते हिलते-डुलते थे, और तीनों मछलियाँ सारा दिन मस्ती में तैरती रहती थीं। पहली मछली का नाम था बुद्धि — वह बहुत समझदार और सोच-समझकर काम करने वाली थी। दूसरी का नाम था चालाकी — उसे हर मुश्किल से निकलने का कोई न कोई उपाय आता था। तीसरी का नाम था ज़िद्दी — वह बहुत हठी थी और किसी भी बदलाव को पसंद नहीं करती थी। एक दिन, तीनों खेलते-खेलते झील के किनारे पहुँचीं। वहीं पर बुद्धि ने दो मछुआरों को बात करते सुना। एक मछुआरा बोला “कल सुबह हम यहाँ आएँगे, इस झील में बहुत सारी बड़ी मछलियाँ हैं!” यह सुनते ही बुद्धि के चेहरे का रंग उड़ गया। वह तुरंत अपने दोस्तों के पास भागी और बोली, “दोस्तों! सुनो! मछुआरे कल झील में आएँगे! हमें अभी यहाँ से निकल जाना चाहिए!” चालाकी मुस्कराकर बोली, “अरे डरती क्यों हो? अगर पकड़े भी गए, तो मैं कोई न कोई चाल चल ही लूँगी।” पर ज़िद्दी मुँह फुलाकर बोली, “मैं कहीं नहीं जाऊँगी! मैंने इस झील में जन्म लिया है, यहीं रहूँगी। अगर किस्मत में पकड़ा जाना लिखा है, तो पकड़ी जाऊँगी!...

🐢 कछुआ और हंस

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एक समय की बात है, एक शांत झील के किनारे एक कछुआ और दो हंस रहते थे। तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे। हर दिन वे साथ खेलते, बातें करते और बहुत खुश रहते थे। लेकिन एक साल भयानक गर्मी पड़ी और झील का पानी धीरे-धीरे सूखने लगा। हंस बहुत चिंतित हुए। उन्होंने कहा, “अगर हम यहाँ रहे तो प्यास से मर जाएँगे। हमें किसी और झील की तलाश करनी होगी।” यह सुनकर कछुआ उदास हो गया। उसने कहा, “मुझे भी अपने साथ ले चलो! मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।” हंस बोले, “लेकिन दोस्त, तुम तो उड़ नहीं सकते! हम तुम्हें कैसे ले जाएँ?” कछुए ने कुछ देर सोचा और फिर बोला, “तुम दोनों अपनी चोंच से एक लंबी लकड़ी पकड़ लो, और मैं बीच में अपने मुँह से उसे कसकर पकड़ लूँगा। बस, मुझे झील तक उड़ा ले चलो।” हंसों को विचार अच्छा लगा, लेकिन उन्होंने सावधानी से कहा, “ठीक है, पर एक बात याद रखना — उड़ते समय अपना मुँह बिल्कुल मत खोलना। अगर तुमने मुँह खोला, तो नीचे गिरकर मर जाओगे।” कछुए ने वादा किया, “चिंता मत करो, मैं मुँह नहीं खोलूँगा।” फिर दोनों हंसों ने लकड़ी को अपनी चोंच में पकड़ा, और कछुए ने बीच में मुँह से कसकर थाम लिया। वे आकाश में ऊँच...

वफ़ादार नेवला

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एक छोटे-से गाँव में एक किसान दंपत्ति रहते थे। उनके घर में एक पालतू नेवला था — शरारती लेकिन बहुत ही वफ़ादार। नेवला परिवार का हिस्सा बन गया था। वह किसान के छोटे बच्चे के साथ खेलता और उसकी रक्षा करता। एक दिन अचानक किसान और उसकी पत्नी को ज़रूरी काम से बाहर जाना पड़ा। जाने से पहले उन्होंने नेवले से कहा, “हम जल्दी लौटेंगे, तुम हमारे बच्चे का ख़याल रखना।” नेवले ने मानो सिर हिलाकर कहा, “चिंता मत करो, मैं हूँ ना!” वे बाहर चले गए, और तभी एक ख़तरनाक साँप धीरे-धीरे घर में घुस आया। वह बच्चे की ओर बढ़ने लगा। नेवले ने यह देखा तो बिना डरे उस पर झपट पड़ा। भयंकर लड़ाई हुई — और आख़िरकार साहसी नेवले ने साँप को मार डाला। लेकिन उसके मुँह और दाँतों पर ख़ून लग गया। थोड़ी देर बाद किसान की पत्नी घर लौटी। दरवाज़े पर नेवले को देखकर उसने देखा — उसके मुँह पर ख़ून लगा है! वह डर और ग़ुस्से में चिल्ला उठी, “ओह भगवान! इस नेवले ने मेरे बच्चे को मार डाला!” उसने बिना सोचे-समझे, ग़ुस्से में नेवले को मार दिया। जब वह घर के अंदर पहुँची, तो देखा — उसका बच्चा सुरक्षित है और पास में मरा हुआ साँप पड़ा है। ...

🐘 हाथी और चूहों की दोस्ती

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एक समय की बात है, एक शांत सा गाँव था। लेकिन एक दिन वहाँ भयंकर भूकंप आया और पूरा गाँव टूट गया। लोग डरकर गाँव छोड़कर चले गए। पर ज़मीन के नीचे रहने वाले चूहे बोले, “हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे! हम यहीं नया घर बनाएँगे।” गाँव के पास एक बड़ा सुंदर तालाब था। हर दिन शाम को वहाँ एक झुंड हाथी नहाने और पानी पीने आता था। तालाब तक जाने का रास्ता उसी गाँव से होकर जाता था। जब भी हाथी वहाँ से गुज़रते, कई छोटे चूहे उनके पैरों के नीचे दब जाते। चूहों के राजा को यह देखकर बहुत दुख हुआ। वह बोले, “अगर ऐसा चलता रहा तो हम सब खत्म हो जाएँगे!” इसलिए उन्होंने हिम्मत करके हाथियों के राजा से मिलने का निश्चय किया। चूहों के राजा ने विनम्रता से कहा — “हे महान हाथी राजा, जब आप गाँव से होकर तालाब की ओर जाते हैं, तो हमारे बहुत से साथी पैरों तले दब जाते हैं। अगर आप कृपा करके दूसरा रास्ता चुन लें, तो हम सदा आपके आभारी रहेंगे। और याद रखिए, एक दिन हम भी आपकी मदद कर सकते हैं।” हाथियों के राजा हँसकर बोले — “हा हा! तुम छोटे-से चूहे हमारी क्या मदद कर सकोगे? फिर भी, हम तुम्हारी बात का आदर करते हैं और रास्ता बदल लेंगे।” क...

सारस और केकड़ा

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एक समय की बात है, एक शांत तालाब में बहुत-सी मछलियाँ, मेंढक और केकड़े रहते थे। तालाब के किनारे एक बूढ़ा सारस रहता था, जो हर दिन पानी के पास खड़ा होकर मछलियाँ पकड़कर खाता था। समय बीतता गया और सारस बूढ़ा हो गया। अब उसके लिए पहले की तरह मछली पकड़ना आसान नहीं रहा। एक दिन उसने सोचा, “ऐसे तो भूखा मर जाऊँगा, कुछ उपाय सोचना होगा।” फिर उसके मन में एक चालाक योजना आई। सारस एक दिन तालाब के किनारे गया और उदास चेहरा बनाकर बोला, “अरे मछलियो, मुझे बहुत दुख है! मैंने सुना है कि लोग इस तालाब को भरकर खेती करने वाले हैं। तब यहाँ पानी नहीं रहेगा और तुम सब मर जाओगी।” यह सुनकर सारी मछलियाँ बहुत डर गईं। वे रोने लगीं, “अब हम क्या करें, सारस दादा?” सारस ने कहा, “चिंता मत करो। मैं तुम्हें एक बड़े तालाब में पहुँचा दूँगा जहाँ बहुत पानी और खाना है। लेकिन मैं बूढ़ा हूँ, इसलिए एक बार में कुछ ही को ले जा सकता हूँ।” मछलियाँ खुशी-खुशी तैयार हो गईं। पर उन्हें यह नहीं पता था कि सारस का असली इरादा क्या है। हर दिन सारस कुछ मछलियाँ लेकर जाता, लेकिन बड़े तालाब में नहीं — बल्कि पहाड़ी पर! वहाँ वह उन्हें मारकर खा जाता और उनकी हड...

बंदर और मगरमच्छ

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एक समय की बात है, एक जंगल में एक बंदर रहता था जो नदी के किनारे एक जाम (बेरी) के पेड़ पर रहता था। उसी जंगल में एक मगरमच्छ और उसकी पत्नी भी रहते थे। एक दिन मगरमच्छ नदी के किनारे आया और पेड़ के नीचे आराम करने लगा। दयालु बंदर ने उसे कुछ फल दिए। मगरमच्छ अगले दिन और फल लेने आया, क्योंकि उसे फल बहुत पसंद थे। कुछ दिन बीतने पर मगरमच्छ और बंदर अच्छे दोस्त बन गए। एक दिन बंदर ने मगरमच्छ की पत्नी के लिए कुछ फल भेजे। उसने फल खाए और उन्हें बहुत पसंद किया, लेकिन उसे जलन होने लगी, क्योंकि उसे अपने पति का बंदर के साथ बिताया गया समय पसंद नहीं था। उसने अपने पति से कहा, "अगर फल इतने रसीले हैं, तो मुझे आश्चर्य है कि बंदर का दिल कितना मीठा होगा। मुझे बंदर का दिल लाओ।" मगरमच्छ अपने दोस्त को मारना नहीं चाहता था, लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं था। उसने बंदर को अपने घर रात के खाने पर बुलाया और कहा कि उसकी पत्नी उससे मिलना चाहती है। बंदर खुश था, लेकिन उसे तैरना नहीं आता था, इसलिए मगरमच्छ उसे अपनी पीठ पर उठा ले गया। मगरमच्छ खुश था कि उसने बंदर को बेवकूफ़ बना दिया, लेकिन ले जाते समय उसने बंदर ...