लालची बंदर और समझदार तोता की कहानी | बच्चों के लिए नैतिक कहानी

       🐒  लालची बंदर और समझदार तोता  🦜


क घने जंगल में एक लाल बंदर रहता था।

दिखने में वह बदसूरत था, लेकिन बहुत चालाक था, और अंदर ही अंदर वह बहुत लालची भी था।

जंगल में जो भी चीज़ देखता, उसे अपना बनाना चाहता था।

उसी जंगल में एक सच्चा और दयालु तोता भी रहता था।


तोता सबके साथ मिल-जुलकर रहता था और सभी की मदद करता था, किसी को कभी धोखा नहीं देता था, और जैसे ही कोई खतरा देखता, सबको चेतावनी दे देता था।

जंगल के सभी जानवर उससे बहुत प्यार करते थे।

तोते का उपहार

एक दिन घूमते-घूमते तोते को जंगल में एक छिपा हुआ पेड़ मिला।

उस पेड़ पर रंग-बिरंगे, मीठे और सुगंधित फल लगे थे।

तोते ने यह खबर सबको दी—

“यह पेड़ सबका है, तुम सब आओ और फल खाओ!”

जंगल के सभी जानवर खुशी-खुशी रोज़ थोड़ा-थोड़ा फल खाने लगे।

बंदर का लालच बढ़ा

लेकिन बंदर ने मन ही मन सोचा—

“अगर यह पूरा पेड़ मेरा हो जाए?

तो मैं अकेले ही सारे फल खा सकूँगा।”

वह रात में आया और पेड़ को रस्सी से बाँध दिया और पास में बड़े-बड़े डंडे रखकर बोला—


“अब यह पेड़ मेरा है! जो भी फल खाने आएगा, उसे मार पड़ेगी!”

अगले दिन यह देखकर सब हैरान रह गए।

तोता बोला—

“बंदर भाई, यह गलत है। यह पेड़ सबका है, तुम इसे अकेले नहीं ले सकते।”

बंदर गुस्से में बोला—

“चुप! जंगल में क्या होगा, यह मैं तय करूँगा!”

बड़ा खतरा आया

कुछ दिनों बाद कुछ लोग जंगल में घूमते-घूमते उस पेड़ के पास पहुँचे।

फल देखकर उन्होंने समझ लिया कि यह बहुत कीमती पेड़ है।

वे बोले—

“इस पेड़ को काटकर ले जाना होगा।”

यह सुनते ही तोते ने सबको चेतावनी दी—

“भागो! लोग पेड़ काटने आए हैं!”

सभी जानवर भाग गए,

लेकिन बंदर पेड़ को अपना मानकर वहीं बैठा रहा—

वह भाग नहीं पाया।

लोग चिल्लाकर बोले—

“अरे, वह बंदर! उसे पकड़ो!”

बंदर डर के मारे काँपने लगा।

वह चिल्लाया—

“तोते! मुझे बचाओ!”

तोते की समझदारी

तोता लोगों के सामने जाकर घायल होने का नाटक करने लगा।

वह जमीन पर गिर गया और पंख फैलाकर चुपचाप पड़ा रहा।

लोग बोले—

“अरे! यह तोता मर रहा है! इसे पकड़ो!”

सब लोग तोते की तरफ दौड़ पड़े।

तभी तोता अचानक उड़ गया—

और उसी मौके का फायदा उठाकर बंदर ने रस्सी तोड़ी और भाग निकला।


लोग समझ गए कि उन्हें धोखा दिया गया है।

गुस्से में वे वहाँ से चले गए।

बंदर को शर्म आई

बंदर तोते के पास आकर बोला—

“मैंने पेड़ पर कब्ज़ा करके बहुत बड़ी गलती की।

फिर भी तुमने मुझे क्यों बचाया?”

तोता मुस्कुराकर बोला—

“अरे मूर्ख बंदर, पेड़ तो सबका होता है।

लालच हमेशा अंत में नुकसान देता है।

और मैं तुम्हारा दोस्त हूँ—तुम्हें मरने कैसे देता?”

बंदर की आँखों में आँसू आ गए।

उसने कहा—

“आज से मैं कभी लालच नहीं करूँगा।

अब मैं भी सबके लिए भलाई करूँगा।”

उस दिन से पेड़ फिर से सबका हो गया।

और जंगल में शांति और प्यार लौट आया।


🌟 नैतिक शिक्षा:

“लालच हमेशा विनाश की ओर ले जाता है।”

“सच्चा दोस्त बुरे समय में साथ नहीं छोड़ता।”




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