जुगनू की रोशनी | उम्मीद और इंसानियत की प्रेरणा देने वाली बंगाली कहानियाँ


“द लाइट ऑफ़ फायरफ्लाइज़” एक दिल को छू लेने वाली बंगाली कहानी है, जहाँ रोशनी सिर्फ़ आँखों से देखने वाली चीज़ नहीं है—यह उम्मीद, विश्वास और इंसानियत की निशानी है। छोटी लड़की रूही हिम्मत और मासूम विश्वास दिखाती है, अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, इंसान के दिल से पैदा हुई रोशनी हमेशा रास्ता दिखाती है। यह कहानी बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर उम्र के पढ़ने वालों के मन में एक गहरा मैसेज छोड़ जाती है।







🌙 जुगनुओं की रोशनी

एक छोटा सा गाँव था—उसका नाम नकाशीपारा था। दिन में गाँव बहुत आम था, लेकिन रात होते ही वह कहानियों की दुनिया जैसा हो जाता था। क्योंकि, रात में, उस गाँव में हज़ारों जुगनू जल उठते थे। उनकी रोशनी से रास्ता, मन और लोगों के छिपे हुए दर्द में भी रोशनी आ जाती थी।
उस गाँव में एक छोटी लड़की रहती थी—उसका नाम रूही था। रूही कम बोलती थी, लेकिन उसकी आँखों में कई सवाल थे। हर रात, वह आँगन में बैठकर जुगनुओं की रोशनी गिनती। उसकी माँ कहती,
“ये रोशनी नहीं है, माँ, ये उम्मीद है।”
एक दिन, अचानक, जुगनू आना बंद हो गए। पूरा गाँव अंधेरे में डूब गया। लोग डरे हुए थे, परेशान थे, और कुछ तो झगड़ने भी लगे थे। उस दिन, सबको समझ आया कि रोशनी न होने पर इंसान कितना बदल जाता है।
लेकिन तिथि रोई नहीं। उसने अपनी छोटी सी झोपड़ी हाथ में ली और जंगल की ओर चलने लगी। सबने कहा,
“अंधेरे में कहाँ जा रही हो?” रूही ने बस इतना कहा,
“रोशनी ढूंढने के लिए।”
काफ़ी देर चलने के बाद, वह एक सूखे पेड़ के नीचे पहुँची। वहाँ उसने देखा—बहुत सारे जुगनू चुपचाप बैठे थे। उन्होंने कहा,
“लोगों को अब रोशनी से प्यार नहीं रहा। वे सिर्फ़ रोशनी का इस्तेमाल करते हैं।”
तिथि ने आँखों में आँसू भरकर कहा,
“सब एक जैसे नहीं होते। मेरी माँ कहती है—रोशनी का मतलब उम्मीद है।”
यह सुनकर, जुगनू फिर से चमक उठे। एक-एक करके वे आसमान में उड़ गए। उस रात, नकाशीपारा फिर से रोशनी से भर गया।
उस दिन से, गाँव में एक कहावत चल पड़ी—
“जो इंसान रोशनी की इज़्ज़त करता है, रोशनी अपना रास्ता खुद ढूँढ लेती है।”
और रूही?
वह अब भी रात में आँगन में बैठकर जुगनू गिनती है,
लेकिन अब वह जानती है—
रोशनी सिर्फ़ आसमान में ही नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी चमकती है 🌟









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