लोमड़ी और कछुए की बुद्धिमानी की कहानी | पंचतंत्र की नैतिक कहानी बच्चों के लिए

 यह प्रेरणादायक पंचतंत्र की कहानी एक चालाक लोमड़ी और एक बुद्धिमान कछुए की है। कई दिनों से भूखी लोमड़ी जब अंजीर के पेड़ से फल नहीं तोड़ पाती, तब एक बूढ़ा कछुआ अपनी समझदारी से उसे समाधान बताता है। कहानी सिखाती है कि हर समस्या का हल केवल ताकत से नहीं, बल्कि बुद्धि और सही सोच से भी निकाला जा सकता है। बच्चों के लिए यह एक सुंदर नैतिक कथा है जो धैर्य, समझदारी और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।



 

🦊 लोमड़ी और अंजीर का पेड़


एक घने जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। कई दिनों से उसे खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा था। चलते-चलते वह एक बड़े अंजीर के पेड़ के नीचे पहुँची। पेड़ फलों से भरा था, लेकिन फल इतने ऊपर थे कि लोमड़ी तक  “पहुंच नहीं पा रही थी

लोमड़ी ने बहुत कोशिश की—कूदकर फल तोड़ने की, डाल पर चढ़ने की, पर किसी तरह भी सफल नहीं हो सकी। अंत में थककर वह पेड़ के नीचे बैठ गई।


उसी समय एक बूढ़ा कछुआ धीरे-धीरे वहाँ आ पहुँचा। लोमड़ी की परेशानी देखकर कछुआ बोला—

“मित्र, हर काम ताकत से नहीं होता, कभी-कभी बुद्धि का इस्तेमाल भी करना पड़ता है।”

लोमड़ी झुंझलाकर बोली, “तुम इतनी धीमी चाल चलते हो, तुम मेरी क्या मदद करोगे?”

कछुआ मुस्कुराकर बोला, “पेड़ के नीचे ज़रा खोदकर देखो, पुराने अंजीर गिरे हुए मिल सकते हैं। सारे फल पेड़ पर ही नहीं रहते।”

लोमड़ी अनिच्छा होते हुए भी उसकी बात मानकर खोदने लगी। थोड़ी ही देर में सचमुच उसे मिट्टी के नीचे बहुत से पके अंजीर मिल गए! वह खुशी से नाच उठी।



लोमड़ी ने कछुए को धन्यवाद देकर कहा, “आज समझ गई, सिर्फ़ कूदने-फाँदने से नहीं, सोच-विचार से भी फल मिलता है।”



कहानी की सीख (Moral)


जो काम ताकत से नहीं होता, वह बुद्धि से किया जा सकता है।
अर्थात, किसी समस्या के समाधान के लिए केवल मेहनत ही नहीं, सही तरीका और समझदारी भी ज़रूरी है।





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