"आलसी मोर और चालाक गौरैया की मज़ेदार कहानी | बच्चों के लिए सीख भरी हिंदी कहानी"
इस कहानी में एक घमंडी लेकिन आलसी मोर और एक मेहनती, समझदार गौरैया के मज़ेदार संबंध को दिखाया गया है। मोर अपनी सुंदरता में इतना खोया रहता था कि भविष्य के लिए कोई तैयारी नहीं करता। लेकिन गौरैया अपनी दूरदृष्टि और मेहनत से साबित करती है कि सिर्फ रूप नहीं, बल्कि समय पर किया गया काम ही जीवन में सफलता की असली कुंजी है। यह कहानी बच्चों को हँसाएगी, सोचने पर मजबूर करेगी और मेहनत के महत्व को समझने में मदद करेगी।
⭐ प्यारी मज़ेदार कहानी: आलसी मोर और चालाक गौरैया
एक गाँव में एक मोर रहता था—नाचने में माहिर, पंख भी रंग-बिरंगे, लेकिन एक बड़ी समस्या थी—वह था बहुत आलसी। कोई काम नहीं करता था। पूरा दिन बस अपनी सुंदरता पर ही गर्व करता रहता।
एक दिन गौरैया ने कहा,
“दोस्त, सुनो, कल से बारिश शुरू होगी। पहले थोड़ा खाना इकट्ठा कर लो।”
मोर ने जम्हाई लेते हुए कहा,
“अरे रहने दो! मैं इतना सुंदर हूँ कि मुझे देखकर कोई-न-कोई तो खाना दे ही देगा।”
गौरैया अपने लिए मेहनत करके खाना जुटाने लगी।
और मोर? खेत में घूम-घूमकर बस अपने पंख फैलाकर नाचতে रहा।
अगले दिन तेज बारिश शुरू हुई। गौरैया अपने छोटे से घोंसले में सूखा खाना खाकर आराम कर रही थी।
और मोर?
बारिश में पूरा भीग गया, पंख उलझ गए, और खाने को कुछ भी नहीं था।
मोर शर्मिंदा होकर गौरैया से बोला,
“तुम सही कह रही थीं। मैं तो केवल सजने-धजने में लगा रहा, काम तो कुछ किया ही नहीं!”
गौरैया हँसकर बोली,
“सुंदर होना बुरा नहीं है, लेकिन मेहनत करना और समय पर काम करना उससे भी ज्यादा ज़रूरी है।”
उस दिन के बाद मोर ने केवल अपनी सुंदरता ही नहीं, बल्कि काम पर भी ध्यान देना शुरू किया।
⭐ कहानी की सीख (Moral):
जो आलसी होता है, वह मुश्किल में पड़ता ही है।
ज़्यादा दिखावे से नहीं—मेहनत ही असली ताकत है।
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