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🐢 कछुआ और हंस

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एक समय की बात है, एक शांत झील के किनारे एक कछुआ और दो हंस रहते थे। तीनों बहुत अच्छे दोस्त थे। हर दिन वे साथ खेलते, बातें करते और बहुत खुश रहते थे। लेकिन एक साल भयानक गर्मी पड़ी और झील का पानी धीरे-धीरे सूखने लगा। हंस बहुत चिंतित हुए। उन्होंने कहा, “अगर हम यहाँ रहे तो प्यास से मर जाएँगे। हमें किसी और झील की तलाश करनी होगी।” यह सुनकर कछुआ उदास हो गया। उसने कहा, “मुझे भी अपने साथ ले चलो! मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।” हंस बोले, “लेकिन दोस्त, तुम तो उड़ नहीं सकते! हम तुम्हें कैसे ले जाएँ?” कछुए ने कुछ देर सोचा और फिर बोला, “तुम दोनों अपनी चोंच से एक लंबी लकड़ी पकड़ लो, और मैं बीच में अपने मुँह से उसे कसकर पकड़ लूँगा। बस, मुझे झील तक उड़ा ले चलो।” हंसों को विचार अच्छा लगा, लेकिन उन्होंने सावधानी से कहा, “ठीक है, पर एक बात याद रखना — उड़ते समय अपना मुँह बिल्कुल मत खोलना। अगर तुमने मुँह खोला, तो नीचे गिरकर मर जाओगे।” कछुए ने वादा किया, “चिंता मत करो, मैं मुँह नहीं खोलूँगा।” फिर दोनों हंसों ने लकड़ी को अपनी चोंच में पकड़ा, और कछुए ने बीच में मुँह से कसकर थाम लिया। वे आकाश में ऊँच...

वफ़ादार नेवला

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एक छोटे-से गाँव में एक किसान दंपत्ति रहते थे। उनके घर में एक पालतू नेवला था — शरारती लेकिन बहुत ही वफ़ादार। नेवला परिवार का हिस्सा बन गया था। वह किसान के छोटे बच्चे के साथ खेलता और उसकी रक्षा करता। एक दिन अचानक किसान और उसकी पत्नी को ज़रूरी काम से बाहर जाना पड़ा। जाने से पहले उन्होंने नेवले से कहा, “हम जल्दी लौटेंगे, तुम हमारे बच्चे का ख़याल रखना।” नेवले ने मानो सिर हिलाकर कहा, “चिंता मत करो, मैं हूँ ना!” वे बाहर चले गए, और तभी एक ख़तरनाक साँप धीरे-धीरे घर में घुस आया। वह बच्चे की ओर बढ़ने लगा। नेवले ने यह देखा तो बिना डरे उस पर झपट पड़ा। भयंकर लड़ाई हुई — और आख़िरकार साहसी नेवले ने साँप को मार डाला। लेकिन उसके मुँह और दाँतों पर ख़ून लग गया। थोड़ी देर बाद किसान की पत्नी घर लौटी। दरवाज़े पर नेवले को देखकर उसने देखा — उसके मुँह पर ख़ून लगा है! वह डर और ग़ुस्से में चिल्ला उठी, “ओह भगवान! इस नेवले ने मेरे बच्चे को मार डाला!” उसने बिना सोचे-समझे, ग़ुस्से में नेवले को मार दिया। जब वह घर के अंदर पहुँची, तो देखा — उसका बच्चा सुरक्षित है और पास में मरा हुआ साँप पड़ा है। ...

🐘 हाथी और चूहों की दोस्ती

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एक समय की बात है, एक शांत सा गाँव था। लेकिन एक दिन वहाँ भयंकर भूकंप आया और पूरा गाँव टूट गया। लोग डरकर गाँव छोड़कर चले गए। पर ज़मीन के नीचे रहने वाले चूहे बोले, “हम अपना घर नहीं छोड़ेंगे! हम यहीं नया घर बनाएँगे।” गाँव के पास एक बड़ा सुंदर तालाब था। हर दिन शाम को वहाँ एक झुंड हाथी नहाने और पानी पीने आता था। तालाब तक जाने का रास्ता उसी गाँव से होकर जाता था। जब भी हाथी वहाँ से गुज़रते, कई छोटे चूहे उनके पैरों के नीचे दब जाते। चूहों के राजा को यह देखकर बहुत दुख हुआ। वह बोले, “अगर ऐसा चलता रहा तो हम सब खत्म हो जाएँगे!” इसलिए उन्होंने हिम्मत करके हाथियों के राजा से मिलने का निश्चय किया। चूहों के राजा ने विनम्रता से कहा — “हे महान हाथी राजा, जब आप गाँव से होकर तालाब की ओर जाते हैं, तो हमारे बहुत से साथी पैरों तले दब जाते हैं। अगर आप कृपा करके दूसरा रास्ता चुन लें, तो हम सदा आपके आभारी रहेंगे। और याद रखिए, एक दिन हम भी आपकी मदद कर सकते हैं।” हाथियों के राजा हँसकर बोले — “हा हा! तुम छोटे-से चूहे हमारी क्या मदद कर सकोगे? फिर भी, हम तुम्हारी बात का आदर करते हैं और रास्ता बदल लेंगे।” क...

सारस और केकड़ा

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एक समय की बात है, एक शांत तालाब में बहुत-सी मछलियाँ, मेंढक और केकड़े रहते थे। तालाब के किनारे एक बूढ़ा सारस रहता था, जो हर दिन पानी के पास खड़ा होकर मछलियाँ पकड़कर खाता था। समय बीतता गया और सारस बूढ़ा हो गया। अब उसके लिए पहले की तरह मछली पकड़ना आसान नहीं रहा। एक दिन उसने सोचा, “ऐसे तो भूखा मर जाऊँगा, कुछ उपाय सोचना होगा।” फिर उसके मन में एक चालाक योजना आई। सारस एक दिन तालाब के किनारे गया और उदास चेहरा बनाकर बोला, “अरे मछलियो, मुझे बहुत दुख है! मैंने सुना है कि लोग इस तालाब को भरकर खेती करने वाले हैं। तब यहाँ पानी नहीं रहेगा और तुम सब मर जाओगी।” यह सुनकर सारी मछलियाँ बहुत डर गईं। वे रोने लगीं, “अब हम क्या करें, सारस दादा?” सारस ने कहा, “चिंता मत करो। मैं तुम्हें एक बड़े तालाब में पहुँचा दूँगा जहाँ बहुत पानी और खाना है। लेकिन मैं बूढ़ा हूँ, इसलिए एक बार में कुछ ही को ले जा सकता हूँ।” मछलियाँ खुशी-खुशी तैयार हो गईं। पर उन्हें यह नहीं पता था कि सारस का असली इरादा क्या है। हर दिन सारस कुछ मछलियाँ लेकर जाता, लेकिन बड़े तालाब में नहीं — बल्कि पहाड़ी पर! वहाँ वह उन्हें मारकर खा जाता और उनकी हड...

बंदर और मगरमच्छ

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एक समय की बात है, एक जंगल में एक बंदर रहता था जो नदी के किनारे एक जाम (बेरी) के पेड़ पर रहता था। उसी जंगल में एक मगरमच्छ और उसकी पत्नी भी रहते थे। एक दिन मगरमच्छ नदी के किनारे आया और पेड़ के नीचे आराम करने लगा। दयालु बंदर ने उसे कुछ फल दिए। मगरमच्छ अगले दिन और फल लेने आया, क्योंकि उसे फल बहुत पसंद थे। कुछ दिन बीतने पर मगरमच्छ और बंदर अच्छे दोस्त बन गए। एक दिन बंदर ने मगरमच्छ की पत्नी के लिए कुछ फल भेजे। उसने फल खाए और उन्हें बहुत पसंद किया, लेकिन उसे जलन होने लगी, क्योंकि उसे अपने पति का बंदर के साथ बिताया गया समय पसंद नहीं था। उसने अपने पति से कहा, "अगर फल इतने रसीले हैं, तो मुझे आश्चर्य है कि बंदर का दिल कितना मीठा होगा। मुझे बंदर का दिल लाओ।" मगरमच्छ अपने दोस्त को मारना नहीं चाहता था, लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं था। उसने बंदर को अपने घर रात के खाने पर बुलाया और कहा कि उसकी पत्नी उससे मिलना चाहती है। बंदर खुश था, लेकिन उसे तैरना नहीं आता था, इसलिए मगरमच्छ उसे अपनी पीठ पर उठा ले गया। मगरमच्छ खुश था कि उसने बंदर को बेवकूफ़ बना दिया, लेकिन ले जाते समय उसने बंदर ...