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राजा और मकड़ी की प्रेरणादायक कहानी | मेहनत और धैर्य की सीख

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बहुत वर्षों पहले की बात है। एक देश में एक साहसी और पराक्रमी राजा रहता था। उसका राज्य बहुत विशाल, समृद्ध और शांतिपूर्ण था। प्रजा उसे बहुत प्यार और सम्मान करती थी, क्योंकि वह न्यायप्रिय और दयालु राजा था। राजा हमेशा अपने देश के लोगों के बारे में सोचता रहता था और यह चिंता करता था कि उनकी सुख-शांति कैसे बनी रहे। लेकिन पड़ोसी राज्य का एक राजा बहुत लालची था। उसकी नज़र इस समृद्ध राज्य पर थी। एक दिन उसने उस राज्य पर अधिकार करने की योजना बनाई। उसने बहुत बड़ी सेना तैयार की और अचानक आक्रमण कर दिया। युद्ध शुरू हो गया। राजा के सैनिक बहादुरी से लड़ने लगे, लेकिन शत्रु पक्ष की सेना बहुत अधिक थी। कई दिनों तक भयंकर युद्ध चलता रहा। अंत में राजा पराजित हो गया। उसके बहुत से सैनिक युद्धभूमि में मारे गए और बाकी इधर-उधर भाग गए। राजा भी अपनी जान बचाकर एक घने जंगल में भाग गया। जंगल के बीच एक अंधेरी गुफा थी। राजा ने उसी गुफा में शरण ली। वहाँ बैठकर वह गहरी चिंता में डूब गया। वह मन ही मन सोचने लगा, “मैं सब कुछ हार चुका हूँ। मेरा राज्य, मेरी सेना और मेरा सम्मान—सब समाप्त हो गया। अब मुझमें क...

आखिरी कोशिश की ताकत | रतन लकड़हारे की मोटिवेशनल कहानी

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एक छोटा सा गाँव था। पूरा गाँव पहाड़ों से घिरा हुआ था। उस गाँव में एक गरीब लकड़हारा रहता था, जिसका नाम रतन था। रतन का एक छोटा सा झोपड़ी जैसा घर था, जहाँ वह अपनी माँ और छोटी बहन के साथ रहता था। हर दिन सुबह होने से पहले ही वह जंगल में लकड़ी काटने निकल जाता था। पूरे दिन कड़ी मेहनत करने के बाद जो कमाई होती, उसी से किसी तरह उसका घर चलता था। गाँव के लोग अक्सर उससे कहते, “रतन, इतनी मेहनत करके क्या होगा? तुम्हारी किस्मत में कोई बड़ी सफलता नहीं है।” लेकिन रतन कभी हार नहीं मानता था। वह बस हल्का सा मुस्कुरा कर कहता, “मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।” एक दिन वह जंगल में लकड़ी काटते-काटते बहुत थक गया। तेज धूप थी, शरीर में बिल्कुल ताकत नहीं बची थी। फिर भी उसके मन का हौसला कम नहीं हुआ। वह लगातार कुल्हाड़ी चलाता जा रहा था। तभी अचानक उसकी कुल्हाड़ी एक मजबूत पत्थर से टकराकर टूट गई। रतन उदास होकर जमीन पर बैठ गया। उसकी आँखों में आँसू भर आए। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे, क्योंकि वही कुल्हाड़ी उसकी एकमात्र सहारा थी। नई कुल्हाड़ी बहुत महँगी थी और उसे खरीदने के लिए उसके...

गाय हमारी माँ – एक प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद कहानी | Moral Story in Hindi

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काशीपुर नाम का बंगाल में एक गाँव था। गाँव चारों ओर से अद्भुत सुंदरता से घिरा हुआ था। गाँव के चारों तरफ हरियाली से भरे खेत थे। हरे-भरे धान के खेत, पक्षियों का मीठा गीत गाना और कच्ची सड़क के किनारे कतार में खड़े ताड़ के पेड़ गाँव की सुंदरता को और बढ़ा देते थे। उसी गाँव में रतन नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी कमला और एकमात्र बेटा राजेश था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, फिर भी वे बहुत खुशी और शांति से अपना जीवन बिताते थे। और उनकी खुशी का सबसे बड़ा कारण थी एक गाय — रानी। रानी का रंग सफेद था। वह बहुत शांत स्वभाव की गाय थी। वह हर दिन बहुत सारा दूध देती थी। उसी दूध को बेचकर रतन अपना घर चलाता था। कभी राजेश की पढ़ाई का खर्च, तो कभी दवाइयों का खर्च — यह सब रानी की वजह से ही संभव हो पाता था। कमला अक्सर कहती थी, “रानी सिर्फ एक गाय नहीं है, वह हमारे परिवार की सदस्य है।” राजेश बचपन से ही रानी को बहुत प्यार करता था। स्कूल से लौटते ही वह सबसे पहले रानी के पास जाता। उसे घास खिलाता, उसके शरीर पर हाथ फेरकर प्यार करता। रानी भी मानो राजेश को अपने बच्चे की तरह प...

हीरू डाकू और छोटा बुबाई | दिल छू लेने वाली प्रेरणादायक कहानी

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बहुत दिनों पहले की बात है। पहाड़ों और जंगलों से घिरा एक छोटा-सा गाँव था—उसका नाम था तालबनी। वहाँ के लोग बहुत ही सीधे-सादे थे। कोई खेती करता था, कोई गाय चराता था, तो कोई नदी से मछली पकड़कर बाज़ार में बेचता था। कुछ लोग जंगल से लकड़ी और शहद इकट्ठा करके अपना जीवन चलाते थे। सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे ही शाम होती, गाँव के लोग जल्दी-जल्दी अपने घरों के दरवाज़े बंद कर लेते। क्योंकि पास के गहरे जंगल में एक भयानक डाकू रहता था—उसका नाम था हीरू डाकू। हीरू डाकू का नाम सुनते ही लोग काँप उठते थे। उसके सिर पर काली पगड़ी, चेहरे पर घनी दाढ़ी और बड़ी-बड़ी मूँछें थीं। हाथ में मोटा बाँस का डंडा रहता था। रात में जब वह चलता, तो दूर से उसकी चाल की आवाज़ सुनाई देती—“ठक ठक ठक!” गाँव वाले तब चुपचाप दीये बुझाकर बैठे रहते। लेकिन गाँव में एक छोटा लड़का था, जिसका नाम था बुबाई। वह बहुत साहसी और जिज्ञासु था। जब सब लोग डाकू से डरते थे, तब बुबाई सोचता, “क्या डाकू सच में इतने बुरे होते हैं?” एक दिन शाम को बुबाई अपनी बछिया को ढूँढने निकला। ढूँढते-ढूँढते वह जंगल के अंदर बहुत दूर चला गया। उसे पता ही नह...

गरीब माँ और बेटे की प्रेरणादायक कहानी | राकेश की संघर्ष भरी सफलता की कहानी

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नकाषीपाड़ा नाम के एक छोटे से गाँव में एक गरीब माँ और उसका इकलौता बेटा राकेश रहते थे। गाँव के बिल्कुल आखिरी छोर पर, बाँस के झुरमुट के पास उनका एक छोटा सा कच्चा घर था। राकेश के पिता बहुत पहले बीमारी के कारण गुजर चुके थे। तभी से घर की सारी जिम्मेदारी उसकी माँ अकेले संभाल रही थी। वह लोगों के घरों में काम करके किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटाती थी। राकेश बहुत शांत स्वभाव का लड़का था। उसकी उम्र केवल तेरह साल थी, लेकिन उसकी आँखों में हमेशा एक दर्द दिखाई देता था। जब गाँव के दूसरे बच्चे मैदान में खेलते थे, तब राकेश अपनी माँ के कामों में हाथ बँटाता था। कभी बाजार से सामान लाता, तो कभी जंगल से जलाने की लकड़ियाँ बटोर कर लाता। वह बचपन से ही अपनी माँ का दुख और संघर्ष देखता आ रहा था, इसलिए वह उनकी तकलीफ़ को अच्छी तरह समझता था। एक दिन सुबह अचानक उसकी माँ बहुत बीमार पड़ गई। उन्हें तेज बुखार था और वह बिस्तर से उठ भी नहीं पा रही थीं। राकेश ने कपड़ा भिगोकर माँ के माथे पर रखा और काँपती आवाज़ में बोला, “माँ, तुम बिल्कुल चिंता मत करो। आज मैं काम करूँगा।” माँ ने कमजोर आवाज़ में कहा, “तू अभी छोटा है बे...

मेहनत और ईमानदारी की प्रेरणादायक कहानी | दो भाइयों की सीख देने वाली कहानी

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एक छोटा-सा गाँव था। उस गाँव का नाम रामनगर था। उस गाँव में एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक बूढ़े पिता और उनके दो बेटे थे। बड़े बेटे का नाम कार्तिक और छोटे बेटे का नाम राहुल था। बूढ़े व्यक्ति एक साधारण किसान थे। उनके पास अधिक धन-दौलत नहीं थी, लेकिन वे बहुत ईमानदार और मेहनती थे। गाँव के सभी लोग उनका सम्मान करते थे। छोटा बेटा राहुल बहुत बुद्धिमान था, लेकिन थोड़ा आलसी भी था। वह सोचता था, “इतनी मेहनत करके क्या होगा? एक न एक दिन किस्मत खुद ही बदल जाएगी।” दूसरी ओर कार्तिक मेहनती और धैर्यवान था। वह मानता था कि इंसान की किस्मत उसके कर्मों से बनती है। एक दिन उनके पिता बहुत बीमार पड़ गए। उन्होंने दोनों बेटों को बुलाकर कहा, “बेटों, मेरे पास तुम्हारे लिए ज्यादा संपत्ति नहीं है। बस यह छोटी-सी जमीन और गाँव के पास वाले पुराने बरगद के पेड़ की बात याद रखना। जीवन में कभी गलत रास्ते पर मत जाना और मेहनत से कभी मत डरना।” कुछ दिनों बाद अचानक पिता की मृत्यु हो गई। दोनों भाई बहुत दुखी हुए। फिर उन्होंने जमीन आपस में बाँट ली। राहुल ने सोचा कि इतनी मेहनत करके खेती करने की कोई जरूरत नहीं है। वह गाँव...

बंदर और मगरमच्छ की कहानी | Panchatantra Story in Hindi with Moral

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बहुत साल पहले की बात है। एक विशाल जंगल के पास एक बहुत शांत नदी बहती थी। नदी के किनारे एक बड़ा आम का पेड़ खड़ा था। उस पेड़ पर हर साल बहुत सारे मीठे आम लगते थे। उसी पेड़ पर एक बुद्धिमान बंदर रहता था। वह दिनभर पेड़ पर फल खाता, इधर-उधर कूदता और खुशी में गाने गाता था। एक दिन दोपहर के समय एक मगरमच्छ नदी से निकलकर पेड़ के नीचे आकर आराम करने लगा। बंदर बहुत शांत स्वभाव का था। उसे देखकर उसने पूछा, “दोस्त, तुम कौन हो? यहाँ क्यों आए हो?” मगरमच्छ बोला, “दोस्त, मैं इसी नदी में रहता हूँ। आज बहुत दूर से तैरकर आया हूँ, इसलिए शरीर थोड़ा थक गया है।” बंदर बहुत दयालु था। उसने पेड़ से कुछ पके आम तोड़कर नीचे फेंक दिए। मगरमच्छ ने फल खाए और बहुत खुश हुआ। उसने बंदर से कहा कि उसने इतने मीठे फल पहले कभी नहीं खाए। उस दिन के बाद मगरमच्छ लगभग हर रोज़ वहाँ आम खाने आने लगा। बंदर भी उसे फल खिलाता और उससे बातें करता। धीरे-धीरे दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। एक दिन मगरमच्छ कुछ आम अपने घर ले गया। उसकी पत्नी ने वे आम खाए और बहुत खुश हुई। लेकिन वह बहुत लालची और स्वार्थी थी। उसने मगरमच्छ से कहा, “अच्छा, जो बंदर ...

दो दोस्तों और भालू की कहानी | Panchatantra Moral Story in Hindi

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हरिहरपुर नाम का एक गाँव था। उस गाँव में दो बहुत घनिष्ठ मित्र रहते थे—राजेश और सुमित। वे दोनों उसी गाँव के रहने वाले थे। बचपन से ही वे साथ-साथ खेलते, स्कूल जाते, घूमने जाते और हर काम मिल-जुलकर करते थे। गाँव के सभी लोग उनकी दोस्ती की मिसाल दिया करते थे। एक दिन राजेश ने सुमित से कहा, “पास के गाँव में मेला लगा है, चलो हम दोनों उसे देखने चलते हैं।” मेला उनके गाँव से काफी दूर था, इसलिए वहाँ जाने के लिए उन्हें एक घने जंगल से होकर गुजरना पड़ता था। इसलिए वे बहुत सुबह यात्रा पर निकल पड़े। आसमान साफ था, पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे और चारों ओर हरियाली की सुंदरता फैली हुई थी। चलते-चलते वे तरह-तरह की बातें करने लगे। राजेश ने कहा, “दोस्त, हम हमेशा इसी तरह एक-दूसरे का साथ देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।” सुमित मुस्कुराकर बोला, “बिलकुल! सच्चा दोस्त कभी भी अपने मित्र को मुसीबत में छोड़कर नहीं भागता।” बातें करते-करते वे जंगल के भीतर गहराई तक पहुँच गए। जंगल बहुत डरावना था। बड़े-बड़े पेड़, झाड़ियाँ और अजीब-अजीब आवाज़ों से पूरा वातावरण रहस्यमय लग रहा था। बीच-बीच में जानवरों और पक्षियों ...

सुनहरी मछली की कहानी: ईमानदारी और मेहनत का सच्चा फल

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 🌏 सुनहरी मछली और ईमानदार मछुआरे की अनोखी कहानी 🌎 एक नदी के किनारे एक छोटा सा गाँव था। उस गाँव का नाम काशीपुर था। नदी के किनारे होने के कारण गाँव के चारों ओर हरियाली थी और पक्षियों की चहचहाहट से भरा रहता था। उसी गाँव में एक मछुआरा रहता था, जिसका नाम बलराम था। बलराम बहुत गरीब था, लेकिन वह बहुत साहसी, मेहनती और ईमानदार इंसान था। हर दिन सुबह-सुबह वह अपनी छोटी नाव लेकर नदी में मछली पकड़ने जाता था। उसके साथ उसका छोटा बेटा राजा भी जाता था। राजा अपने पिता से मछली पकड़ना सीख रहा था। एक दिन सुबह वे दोनों नदी पर गए। आसमान में लाल-लाल सूरज उग रहा था और नदी का पानी चमक रहा था। बलराम ने जाल डाला, लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी जाल में ज्यादा मछलियाँ नहीं फँसीं। राजा थोड़ा दुखी होकर बोला, “पिताजी, आज तो बहुत कम मछलियाँ मिलीं!” बलराम मुस्कुराकर बोला, “बेटा, चिंता मत करो। हर दिन एक जैसा नहीं होता। कभी ज्यादा मिलता है, कभी कम। लेकिन हमें कोशिश करना नहीं छोड़ना चाहिए।” उन्होंने फिर से जाल डाला। अचानक जाल बहुत भारी हो गया। राजा उत्साहित होकर बोला, “पिताजी! लगता है कोई बहुत बड़ी मछ...

सारस और घड़े की कहानी | बच्चों के लिए प्रेरणादायक हिंदी कहानी

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एक समय की बात है। एक सारस था। वह कई दिनों से बहुत प्यासा था, क्योंकि कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण तेज गर्मी में चारों ओर सूखा पड़ गया था। नदियाँ-नाले लगभग सूख चुके थे और तालाबों में भी बहुत कम पानी था। सारस काफी देर तक आसमान में उड़-उड़कर चारों ओर पानी खोज रहा था, लेकिन उसे कहीं भी ठीक से पानी नहीं मिल रहा था। उसका गला सूखकर बिलकुल सूखा हो गया था और उसकी आँखें धुंधली होने लगी थीं। आखिरकार वह एक छोटे से गाँव में पहुँचा। गाँव बहुत शांत और सुंदर था, लेकिन वहाँ भी गर्मी के कारण कई जगह पानी की कमी थी। सारस ने हार नहीं मानी। उसने सोचा, “अगर मैं कोशिश करता रहूँ, तो मुझे कहीं न कहीं पानी जरूर मिल जाएगा।” उड़ते-उड़ते अचानक उसे दूर एक घर के आँगन में एक मिट्टी का घड़ा दिखाई दिया। घड़ा एक कोने में रखा था। सारस जल्दी से नीचे उतर आया। उसके मन में खुशी की लहर दौड़ गई—“शायद इसमें पानी होगा!” वह घड़े के पास गया और अंदर झाँककर देखा। सचमुच उसमें थोड़ा पानी था! लेकिन एक समस्या थी—पानी घड़े के बहुत नीचे था। सारस ने देखा कि उसकी चोंच इतनी लंबी नहीं है कि वह नीचे तक पहुँच सके। उसने बहुत को...

शेर और चूहे की कहानी | बच्चों के लिए नैतिक शिक्षा वाली प्रेरणादायक कहानी

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             🌏🌏 शेर और चूहे की कहानी 🌏🌏 एक समय की बात है, एक घने जंगल में एक शेर रहता था। वह जंगल का राजा था। एक दिन शेर गहरी नींद में सो रहा था। तभी एक छोटा सा चूहा दौड़ते-दौड़ते उसके नाक के अंदर घुस गया। तुरंत ही शेर की नींद खुल गई। गुस्से में आकर उसने चूहे को अपने बड़े पंजे में पकड़ लिया। चूहा डर के मारे कांपते हुए बोला, “महाराज, मुझसे गलती हो गई। कृपया मुझे छोड़ दीजिए। मैं बहुत छोटा हूँ, आपका कोई नुकसान नहीं कर सकता। शायद एक दिन मैं भी आपके काम आ सकूं।” शेर हंसकर बोला, “तू इतना छोटा है! तू मेरी क्या मदद करेगा?” फिर भी उसे दया आ गई और उसने चूहे को छोड़ दिया। कुछ दिनों बाद शेर मुसीबत में पड़ गया। वह शिकारियों के बिछाए जाल में फंस गया। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन बाहर नहीं निकल पाया। वह गुस्से में जोर-जोर से दहाड़ने लगा और चिल्लाने लगा। शेर की आवाज सुनकर वही छोटा चूहा वहां पहुंच गया। उसने शेर की हालत देखी और तुरंत जाल की रस्सियों को कुतरकर काट दिया। आखिरकार शेर आजाद हो गया। वह आभारी होकर बोला, “आज मुझे समझ में आ गया कि किसी क...

लालची बंदर और समझदार तोता की कहानी | बच्चों के लिए नैतिक कहानी

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       🐒   लालची बंदर और समझदार तोता   🦜 क घने जंगल में एक लाल बंदर रहता था। दिखने में वह बदसूरत था, लेकिन बहुत चालाक था, और अंदर ही अंदर वह बहुत लालची भी था। जंगल में जो भी चीज़ देखता, उसे अपना बनाना चाहता था। उसी जंगल में एक सच्चा और दयालु तोता भी रहता था। तोता सबके साथ मिल-जुलकर रहता था और सभी की मदद करता था, किसी को कभी धोखा नहीं देता था, और जैसे ही कोई खतरा देखता, सबको चेतावनी दे देता था। जंगल के सभी जानवर उससे बहुत प्यार करते थे। ⭐ तोते का उपहार एक दिन घूमते-घूमते तोते को जंगल में एक छिपा हुआ पेड़ मिला। उस पेड़ पर रंग-बिरंगे, मीठे और सुगंधित फल लगे थे। तोते ने यह खबर सबको दी— “यह पेड़ सबका है, तुम सब आओ और फल खाओ!” जंगल के सभी जानवर खुशी-खुशी रोज़ थोड़ा-थोड़ा फल खाने लगे। ⭐ बंदर का लालच बढ़ा लेकिन बंदर ने मन ही मन सोचा— “अगर यह पूरा पेड़ मेरा हो जाए? तो मैं अकेले ही सारे फल खा सकूँगा।” वह रात में आया और पेड़ को रस्सी से बाँध दिया और पास में बड़े-बड़े डंडे रखकर बोला— “अब यह पेड़ मेरा है! जो भी फल खाने आएगा, उसे मार पड़ेगी!” अग...

नकासिपाड़ा की दुखी माँ की कहानी | माँ के त्याग और बेटे की सफलता

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🌍  माँ का त्याग | रोहित और उसकी माँ की भावुक कहानी  🌍 गाँव का नाम नकासिपाड़ा था। इस गाँव में एक गरीब परिवार रहता था। उस परिवार में एक दुखी माँ थी, जिसका नाम मीरा था, और उसका छोटा बेटा रोहित था। गाँव के एक कोने में मिट्टी के छोटे से कच्चे घर में वह अपने बेटे रोहित के साथ दिन बिताती थी। उसके पति की कई साल पहले बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। तभी से घर की सारी जिम्मेदारी मीरा के कंधों पर आ गई। मीरा बहुत गरीब थी, लेकिन उसके मन में अपार शक्ति थी। वह हर दिन सुबह जल्दी उठकर दूसरों के घर काम करने जाती—कभी बर्तन माँजती, कभी कपड़े धोती, तो कभी खेत में जाकर धान काटती। इसके अलावा भी वह कई तरह के मेहनत वाले काम करती थी। दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद जो थोड़ा-बहुत पैसा मिलता, उसी से वह अपने बेटे और अपना पेट पालती थी। रोहित बहुत होशियार छात्र था। वह स्कूल में हमेशा पहला स्थान प्राप्त करता था। लेकिन उसकी पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें, कॉपियाँ या अच्छे कपड़े कुछ भी नहीं थे। फिर भी वह अपनी माँ के सामने कभी कुछ नहीं मांगता था, क्योंकि वह जानता था कि उसकी माँ उसे पालने के लिए कितनी मेहन...

गरीब किसान की प्रेरणादायक कहानी | मेहनत और धैर्य की जीत

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       🏝️ हार न मानने वाले एक किसान की कहानी🏝️ एक समय एक छोटे से गाँव में एक गरीब किसान परिवार रहता था। उस गरीब किसान का नाम रतन था। उसके पास कुछ भी नहीं था—न बड़ी जमीन, न गाय-बैल। केवल एक छोटा सा खेत और अपने दो हाथ ही उसका सहारा थे। हर दिन सुबह उठकर रतन खेत में जाता था। उसके पैर नंगे होते, सिर पर धूप पड़ती, फिर भी उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान रहती। वह कहता था, “मिट्टी कभी किसी को धोखा नहीं देती, जितना प्यार दोगे, उतना ही लौटाएगी।” लेकिन उस साल बारिश ठीक से नहीं हुई। खेत की सारी फसल सूख गई। गाँव के लगभग सभी लोग शहर चले गए। रतन भी बहुत चिंता में पड़ गया—घर में उसकी पत्नी और छोटा बेटा था, उन्हें खाना कैसे देगा? एक दिन वह अपने बीज लेकर खेत में गया। पास के लोग हँसने लगे—“इतनी सूखी जमीन में बीज बोकर क्या होगा?” रतन शांत स्वर में बोला, “कोशिश नहीं करेंगे तो फल कैसे मिलेगा?” वह हर दिन उस खेत में जितना हो सकता था, पानी देता। अपने पीने के पानी में से भी थोड़ा बचाकर खेत में डालता। इस तरह कुछ दिन बीत गए। एक रात अचानक आकाश में काले बादल छा गए और तेज बारिश शुर...

छोटी चिड़िया नीतू की कहानी | बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानी (Moral Story in Hindi)

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यह बच्चों की कहानी नीतू चिड़िया की है, जो हमें हिम्मत और आत्मविश्वास सिखाती है… 🐦 छोटी चिड़िया नीतू की कहानी एक समय की बात है, एक गाँव में एक छोटी सी चिड़िया रहती थी, जिसका नाम नीतू था। नीतू अपने माता-पिता के साथ गाँव के एक कोने में एक बड़े पेड़ की डाली पर रहती थी। नीतू बहुत अच्छी और शांत स्वभाव की थी, लेकिन उसमें  🎄एक समस्या थी—  उसे उड़ने से बहुत डर लगता था। उसके सभी दोस्त आसमान में उड़ते, खेलते और बहुत मज़े करते थे। लेकिन नीतू बस अपने घोंसले में बैठकर उन्हें देखती रहती थी।   एक दिन नीतू की माँ ने कहा, “बेटा, अगर तुम कोशिश नहीं करोगी, तो कभी उड़ना नहीं सीख पाओगी।” नीतू थोड़ी डर गई, लेकिन धीरे से बोली, “ठीक है माँ, मैं कोशिश करूँगी।” 🎄 पहला प्रयास नीतू घोंसले के किनारे जाकर खड़ी हो गई। वह बोली, “माँ, मुझे बहुत डर लग रहा है।” उसके छोटे-छोटे पंख डर से कांपने लगे। उसने आँखें बंद की और छलांग लगा दी… लेकिन वह नीचे गिरने लगी!  तभी उसकी माँ तुरंत आकर उसे पकड़ लेती है।   🎄 दूसरा प्रयास उसकी माँ ने प्यार से कहा, “डर मत, मैं हूँ ना। एक बार फिर कोशिश ...